ईरान की मिसाइलें।  
विदेश

ईरान अमेरिका से टक्कर लेने के लिए यूं ही नहीं तैयार...उसकी 5 मिसाइलों से कांपते हैं बड़े-बड़े देश

Iran Missile Power: ईरान की मिसाइलें आधुनिक डिफेंस सिस्टम को मिट्टी में मिलाने का दम रखती हैं। वर्षों की पाबंदियों के बावजूद एक ऐसी फौज खड़ी की है, जिसकी स्पीड और ताकत का अंदाजा लगाना मुश्किल है।

रंजन कुमार

Iran Missiles: ईरान ने मिसाइल तकनीक को हाई लेवल पर पहुंचाया है। वह हजारों किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को बिना सीमा पार किए निशाना बना सकता है। सैन्य विशेषज्ञों की रिपोर्टों के अनुसार ईरान की मिसाइल रणनीति केवल स्पीड नहीं, बल्कि सटीक वार पर बेस्ड है। ईरान ने ऐसी मिसाइलें बना रखी हैं, जो आवाज की स्पीड से 15 गुना तेज हैं। हवा में दिशा बदल सकती हैं।

ईरान ने पहाड़ों के नीचे सुरंगों का जाल बिछाया है। इन्हें मिसाइल सिटी कहते हैं। यहां से मिसाइलें एक साथ दुश्मन पर गिर सकती हैं। इन ठिकानों पर हवाई हमले या बंकर-बस्टर बमों का असर नहीं होता। ईरान का मिसाइल प्रोग्राम उस मोड़ पर है, जहां इसे रोकना नामुमकिन लगता है।

ईरान की ये हैं 5 सबसे घातक मिसाइलें

फतेह-2: ईरान की सबसे आधुनिक और खतरनाक मिसाइल है, जिसकी रफ्तार मैक 15 है। मतलब आवाज से 15 गुना फास्ट है। हाइपरसोनिक मिसाइल है। हवा में दिशा बदलती है। इस वजह से विश्व का कोई रडार ट्रैक नहीं कर पाता। कोई डिफेंस सिस्टम इसे नहीं गिरा पाता। इसकी रेंज 1500 किमी है।

सेजिल: ये ईरान की सबसे पुरानी और लंबी दूरी की भरोसेमंद मिसाइल है। मारक क्षमता 2000-2500 किमी है। मतलब पूरे इजराइल और यूरोप के कुछ इलाकों को जद में ले सकती है। यह ठोस ईंधन से चलती है। मतलब मिसाइलों को लॉन्च करने में कुछ मिनट लगेंगे, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका न मिलता है।

खैबर शिकन : इस मिसाइल के नाम का मतलब खैबर को तोड़ने वाली है। जो तीसरे जेनरेशन की मिसाइल है। यह अन्य मिसाइलों से बेहद हल्की है। इस कारण इसे मोबाइल लॉन्चरों पर लादकर कहीं पहुंचाया जा सकता है। इसकी रेंज 1450 किमी है। यह इजराइल के डिफेंस शील्ड को चकमा देने में दक्ष है।

खुर्रमशहर-4: इसे खैबर नाम से भी जाना जाता है। ये भारी बमबारी को बनाई गई है। यह 1500 किग्रा का विस्फोटक ले जा सकती है। मतलब एक मिसाइल पूरे शहर को खंडहर बना सकती है। इसकी रेंज 2000 किमी है। इसकी सटीकता अधिक है। यह पिन पॉइंट टारगेट पर हमला करती है।

हज कासिम : इस मिसाइल का नाम जनरल कासिम सुलेमानी की याद में रखा गया। रेंज 1,400 किलोमीटर है। यह खासकर दुश्मन के रडार को चकमा देने और रडार रोधी प्रणालियों से बचने को बनी है।

ईरान की मिसाइल सिटी

ईरान ने पूरे देश में पहाड़ों के अंदर गहरी सुरंगें बना रखी है, जिसे मिसाइल सिटी कहते हैं। इनकी खासियत है कि यहां से मिसाइलें छोड़ने के बाद लॉन्चर वापस सुरंग में लौट आते हैं। इन सुरंगों के ऊपर बड़े-बड़े हमलों का असर नहीं होता है। दूसरी ओर ईरान जवाबी कार्रवाई करने की स्थिति में रहता है।

दुनिया के डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती

छोटी दूरी के रॉकेटों को रोकने में आयरन डोम सक्षम है। मगर, ईरान की बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें एक साथ आती हैं तो कोई सिस्टम उन्हें नहीं रोक सकता। इजराइल के एरो-3 और अमेरिका के थाड सिस्टम के लिए भी मैक-15 की रफ्तार वाली मिसाइल को रोक पाना मुश्किल है।

गुजरात और महाराष्ट्र में PM मोदी का Gen Z से सीधा संवाद, वडोदरा में Y-आकार के रैंप पर युवाओं से करेंगे बातचीत

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को जान से मारने की धमकी, मंत्रालय कार्यालय पहुंची गुमनाम चिट्ठी से मचा हड़कंप

Delhi Building Collapse Live: PG मालिक के बाद पत्नी-बेटा भी अरेस्ट, सत्य निकेतन में 27 घंटे बाद रेस्क्यू खत्म

फिरोज गांधी: नेहरू परिवार के सदस्य नहीं, आज़ाद भारत के पहले बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश करने वाले सांसद

सत्य निकेतन हादसे के बाद कॉकरोचों ने बढ़ाई सरकार की टेंशन, रखीं ये 7 मांगें