ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरान-अमेरिका युद्ध टालने की कोशिश; तुर्किये जाएंगे विदेश मंत्री अराघची; ट्रंप की धमकी से सहमा मिडिल ईस्ट

Iran US War: डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले की चेतावनी के बाद ईरान ने युद्ध टालने के लिए तुर्किये के जरिए कूटनीतिक रास्ते खोल दिए हैं क्योंकि ट्रंप ने सीधे चेतावनी दी है कि ईरान के पास समय कम है।

अमन उपाध्याय

Abbas Araghchi Turkey Visit: ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव का खतरा अपने चरम पर पहुंच गया है। इस संभावित विनाशकारी संघर्ष को रोकने के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार को तुर्किये की राजधानी अंकारा की यात्रा जा रहे हैं। तुर्किये के राजनयिक तेहरान को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि उसे अमेरिकी हमले से बचना है, तो अपने परमाणु कार्यक्रम पर कुछ रियायतें देनी ही होंगी।

तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच एक वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि दोनों देशों के बीच एक दशक से जारी सीधे संवाद के गतिरोध को तोड़ा जा सके।

ईरान के पास के बहुत ही कम समय

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के पास समझौते के लिए समय बहुत कम बचा है। उन्होंने संकल्प लिया है कि अमेरिका का हमला वेनेजुएला में हुए हस्तक्षेप से कहीं अधिक हिंसक और व्यापक होगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने जून में हुए 12-दिवसीय युद्ध के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट कर दिया था, हालांकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस दावे पर अलग-अलग राय रखती हैं।

ईरान की सैन्य तैयारी और कमजोरियां

ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह कूटनीति के साथ-साथ सैन्य मुकाबले के लिए भी खुद को तैयार कर रहा है। ईरानी सेना के प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातामी ने घोषणा की है कि जून युद्ध के बाद से ईरान ने अपनी रणनीति बदली है और 1,000 नए समुद्र एवं जमीन आधारित ड्रोन तैयार किए हैं। उन्होंने दावा किया कि ये ड्रोन और ईरान का मिसाइल भंडार किसी भी हमले का 'मुंहतोड़ जवाब' दे सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की सबसे बड़ी सैन्य कमजोरी उसका हवाई रक्षा तंत्र है।

अमेरिका की कड़ी शर्तें

अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान को हमले से बचने के लिए वाशिंगटन की चार प्रमुख मांगों को पूरा करना होगा:

  • अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को किसी तीसरे देश को सौंपना।
  • घरेलू स्तर पर यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह बंद करना।
  • अपने मिसाइल कार्यक्रम पर सीमाएं लगाना।
  •  प्रॉक्सी समूहों को समर्थन देना बंद करना।

तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने स्वीकार किया है कि ईरान के लिए इन शर्तों को स्वीकार करना 'अपमानजनक' और नेतृत्व के लिए समझाना मुश्किल हो सकता है।

खाड़ी देशों और क्षेत्र का रुख

संभावित युद्ध की आशंका से पूरे मिडिल ईस्ट में घबराहट का माहौल है। खुद को ईरानी जवाबी कार्रवाई से बचाने के लिए, अधिकांश खाड़ी देशों ने घोषणा की है कि वे अपने हवाई क्षेत्र या क्षेत्र का उपयोग ईरान पर हमला करने के लिए नहीं करने देंगे। तुर्किये ने भी चेतावनी दी है कि ईरान पर हमला करना गलत होगा और तेहरान को क्षेत्र में विश्वास बहाली पर ध्यान देना चाहिए।

Explainer: कब-कब विवादों में घिरे धीरेंद्र शास्त्री? 10 बयानों पर हुआ विरोध, कई बार मांगनी पड़ी माफी

Diwali Trains: मुंबई-नागपुर के बीच 12 और स्पेशल ट्रेनें चलेंगी, 4 नवंबर से शुरू होगी बुकिंग; जानिए शेड्यूल

राहुल ने PM मोदी को दी खुली चुनौती: बोले- डरिए मत, मंच पर आमने-सामने बैठिए; राजनाथ-समेत 4 नेताओं से की अपील

SIR: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम गायब तो भी भर सकेंगे फॉर्म-6, चुनाव आयोग ने दी बड़ी राहत

दिवाली-छठ पर यूपी-बिहार वालों को ट्रेनों में मिल सकता है कन्फर्म टिकट, रेलवे चला रहा करीब 2,000 स्पेशल ट्रेनें