ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरान का ट्रंप को करारा जवाब; 'हमने नहीं लगाई बातचीत की कोई गुहार', धमकियों के बीच समझौते से साफ इनकार

Iran US Talks Denied: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि तेहरान ने वाशिंगटन से बातचीत का अनुरोध किया है।

अमन उपाध्याय

Iran US Tension News In Hindi: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने बुधवार को सरकारी मीडिया के माध्यम से एक बड़ा बयान जारी किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान ने अमेरिका से बातचीत की कोई गुहार नहीं लगाई है। अराकची ने बताया कि हाल के दिनों में उनका अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से न तो कोई संपर्क हुआ है और न ही ईरान की ओर से बातचीत का कोई औपचारिक अनुरोध भेजा गया है।

ट्रंप की 'अर्माडा' वाली धमकी

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयोवा में एक संबोधन के दौरान दावा किया था कि एक और सैन्य बेड़ा (अर्माडा) ईरान की ओर बढ़ रहा है। ट्रंप ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान उनसे समझौता कर लेगा और उन्हें यह बहुत पहले ही कर लेना चाहिए था ताकि उनके पास अपना देश तो बचे। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने क्षेत्र में बड़े सैन्य बेड़ों की तैनाती को और बढ़ा दिया है।

बातचीत के लिए ईरान की शर्तें

ईरानी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि बातचीत धमकियों के साथ नहीं चल सकती। उन्होंने कहा कि वार्ता तभी संभव है जब कोई खतरा या अत्यधिक मांग सामने न रखी जाए। हालांकि, तेहरान विभिन्न मध्यस्थों के संपर्क में है और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत में कहा है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में युद्ध रोकने वाली हर प्रक्रिया का स्वागत करता है।

अमेरिका की सख्त मांगें और ईरान का रुख

अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने इस महीने की शुरुआत में ईरान के साथ प्रस्तावित बातचीत को लेकर कई कड़ी और सख्त शर्तें सामने रखी थीं। इन शर्तों में ईरान द्वारा यूरेनियम संवर्धन पर पूरी तरह रोक लगाने, पहले से संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर हटाने, लंबी दूरी की मिसाइलों के विकास और परीक्षण कार्यक्रम पर कड़े प्रतिबंध लगाने तथा क्षेत्र में सक्रिय प्रॉक्सी संगठनों को दिया जाने वाला समर्थन समाप्त करने जैसी मांगें शामिल थीं।

सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने इन सभी शर्तों को अस्वीकार्य बताते हुए पूरी तरह से खारिज कर दिया है। तेहरान का मानना है कि ये मांगें उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने जैसी हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच वार्ता की संभावनाएं फिलहाल कमजोर नजर आ रही हैं और क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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