ब्रिटिश विदेश सचिव यवेट कूपर, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

होर्मुज में जंग जैसे हालात! 25 से अधिक जहाजों पर हमले के बाद ब्रिटेन ने बुलाई बड़ी बैठक, भारत भी शामिल

Strait Of Hormuz को फिर से खोलने के लिए ब्रिटिश विदेश मंत्री की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक हुई। जिसमें भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने हिस्सा लिया। 

अमन उपाध्याय

India UK Participation Strait Of Hormuz: होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर की अध्यक्षता में हुई इस ऑनलाइन बैठक में भारत ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया, जहां भारत का प्रतिनिधित्व विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने किया। इस बैठक में लगभग 60 देश ईरान को 'वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने' से रोकने के लिए होर्मुज को फिर से खोलने के लिए संयुक्त कार्रवाई पर चर्चा किए।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर 'सीधा हमला'

बैठक के दौरान ब्रिटिश विदेश मंत्री ने होर्मुज में बढ़ते तनाव के लिए ईरान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ईरान की कार्रवाई को 'वैश्विक आर्थिक सुरक्षा पर सीधा हमला' करार देते हुए कहा कि ईरान की 'लापरवाही' ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर खतरे में डाल दिया है। ब्रिटेन का लक्ष्य इस संकट को कूटनीतिक तरीके से सुलझाना और उन समुद्री रास्तों को फिर से चालू करना है जिन्हें ईरान ने अमेरिका-इजरायल सैन्य अभियान के जवाब में निशाना बनाया है।

2,000 जहाज फंसे

आंकड़ों के जरिए स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए कूपर ने बताया कि इस मार्ग में अब तक 25 से अधिक जहाजों पर हमले हो चुके हैं। वर्तमान में करीब 2,000 जहाजों पर सवार लगभग 20,000 नाविक फंसे हुए हैं। इस गतिरोध के कारण न केवल कुवैत, बहरीन, कतर और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों के व्यापारिक मार्ग प्रभावित हुए हैं बल्कि एशिया के लिए लिक्विड नेचुरल गैस (LNG), अफ्रीका के लिए खाद और पूरी दुनिया के लिए जेट फ्यूल की आपूर्ति पर भी गहरा असर पड़ा है।

अंतरराष्ट्रीय निंदा और भारत की भूमिका

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर द्वारा घोषित इस बैठक के लिए भारत को विशेष निमंत्रण मिला था। बैठक में उल्लेख किया गया कि ईरान का यह रवैया उन देशों के प्रति भी आक्रामक है जो इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल नहीं थे जिसकी संयुक्त राष्ट्र में भारत समेत 130 से अधिक देशों ने पहले ही कड़ी निंदा की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज का मार्ग जल्द नहीं खुला तो यह न केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाएगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा संकट को और अधिक गहरा कर देगा जो दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ा खतरा है।

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