India-Iran Deal: मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी हमले में ईरान के खर्ग द्वीप को निशाना बनाए जाने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। इस हमले को अमेरिका की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, जिसने क्षेत्रीय समीकरणों को बदल दिया है।
खर्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात के लिए बेहद अहम माना जाता है और यहां हमला होने से सीधे तौर पर चीन के आर्थिक हितों को भी नुकसान पहुंचा है, क्योंकि चीन ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है। इसी बीच भारत और ईरान के कूटनीतिक संबंधों में भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिली है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हाल ही में बातचीत हुई है, जिसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के दो तेल टैंकरों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी। ये दोनों टैंकर शिवालिक और नंदा देवी होर्मुज पार कर भारत पहुंच चुके हैं। हालांकि अभी भी रिपोर्टों के मुताबिक भारत के करीब 22 टैंकर इस रणनीतिक जलमार्ग में फंसे हुए हैं।
सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी के अनुसार भारत और ईरान के बीच एक तरह की समझ बनी है, जिसके तहत यह अनुमति दी गई। चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और फेसबुक पर दावा किया कि नई दिल्ली और तेहरान के बीच एक ‘क्विड प्रो क्वो’ यानी लेन-देन आधारित समझौता हुआ है।
इस समझौते के तहत भारत ने ईरानी नौसेना के करीब 180 नाविकों को अपने देश लौटने की अनुमति दी। इसके बदले ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को होर्मुज से सुरक्षित गुजरने दिया। यह पूरी प्रक्रिया गुरुवार और शुक्रवार के बीच पूरी हुई। कोच्चि से एक चार्टर फ्लाइट ईरानी नाविकों को लेकर तेहरान के लिए रवाना हुई। ये नाविक IRIS लवान नाम के ईरानी नौसैनिक जहाज के क्रू मेंबर थे। अमेरिकी हमले के बाद यह जहाज कोच्चि बंदरगाह पर आकर रुका था और भारत ने मानवीय आधार पर इसे शरण दी थी।
यह घटनाक्रम उस बड़े घटनाक्रम से भी जुड़ा है जिसमें 4 मार्च को अमेरिकी पनडुब्बी यूएसएस चार्लोटी ने हिंद महासागर में ईरान के फ्रिगेट आईआरआईएस डेना को डुबो दिया था। यह घटना भारत के समुद्री क्षेत्र से बाहर, श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई थी। इस हमले में 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई, जबकि 61 अब भी लापता बताए जा रहे हैं और 32 को बचा लिया गया था।
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भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बेहद अहम है क्योंकि देश का करीब 40 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है। इसके अलावा कतर से आने वाली बड़ी मात्रा में एलपीजी भी इसी जलमार्ग से होकर गुजरती है। बताया जा रहा है कि शिवालिक और नंदा देवी टैंकरों ने 92 हजार टन से अधिक एलपीजी लेकर यह मार्ग पार किया।