यूएन में भारत के प्रतिनिधि सोर्स- @IndiaUNNewYork
विदेश

भारत ने यूएन में पाकिस्तान को दिखाया आईना! कानून के शासन पर चर्चा के दौरान हुई बेज्जती, आतंकवाद पर लगाई लताड़

India At UN: भारत ने यूएन में कानून के शासन पर पाकिस्तान की टिप्पणियों का कड़ा जवाब दिया। भारत ने कहा कि इस्लामाबाद इस विषय पर 'लेक्चर' नहीं दे सकता, क्योंकि वहां सेना ही शासन है और सेना ही कानून है।

नितिन कुमार राय

Highlights

  • भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को खूब सुनाया

  • कानून के शासन पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान की बेजज्ती

  • काउंसल मैथिली आर ने इस्लामाबाद पर गंभीर आरोप लगाए

India Slams Pakistan: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर पाकिस्तान को आईना दिखाया है। रविवार को पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार के बारे में आरोप लगाकर, अल्पसंख्यकों के अधिकारों, न्यायपालिका की आजादी और प्रेस की आजादी के मामले में अपने खुद के रिकॉर्ड से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर मैथिली आर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून के शासन पर चर्चा के दौरान इस्लामाबाद पर आरोप लगाया कि वह विदेशों में तो कानूनी जवाबदेही की बातें करता है, लेकिन अपने देश में इसे कमजोर करता है।

दूसरों को उपदेश देता है पाकिस्तान

भारत की ओर से उन्होंने पाकिस्तान को एक ऐसा देश बताया जहां ‘सेना ही नियम और कानून है’, आगे उन्होंने कहा कि वहां न्यायपालिका की आजादी को कमजोर किया गया है, आम नागरिकों पर सैन्य अदालतों में मुकदमे चलाए जा रहे हैं और राजनीतिक विरोध को दबाया जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन द्वारा X पर शेयर किए गए एक बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान दूसरों को कानून के शासन के बारे में उपदेश देता है। फिर भी अपने देश में, सेना ही नियम है और सेना ही कानून है। न्यायपालिका की आजादी को कमज़ोर किया गया है, आम नागरिकों पर सैन्य अदालतों में मुकदमे चलाए जाते हैं और राजनीतिक विरोध को दबाया जाता है।

प्रेस की आजादी का किया जिक्र

मैथिली ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर पाकिस्तान के दावों को भी चुनौती दी और बताया कि देश के बनने के बाद से वहां की आबादी में अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी लगातार कम हुई है।

उन्होंने पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी 'विदेशी मीडिया सुविधा दिशानिर्देशों' का जिक्र करते हुए वहां प्रेस की आजादी पर सवाल उठाए। इन दिशानिर्देशों के तहत, विदेशी मीडिया संस्थानों को इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर आजादी से रिपोर्टिंग करने के लिए 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' लेना जरूरी है। भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान पर कानून के शासन को बनाए रखने में बार-बार नाकाम रहने का आरोप लगाया और कहा कि भारत पर उसका ध्यान केंद्रित करना गलत है।

आतंकवाद पर पाकिस्तान को सुनाया

इस बातचीत में सीमा पार आतंकवाद को लेकर दोनों देशों के बिल्कुल अलग-अलग रुख भी सामने आए। मैथिली ने पिछले साल पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमले पर भारत की प्रतिक्रिया का बचाव किया और 'ऑपरेशन सिंदूर' को नपा-तुला और उचित कदम बताया। उन्होंने पाकिस्तान से भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करने को कहा।

उन्होंने तर्क दिया कि ऐसा करने से पाकिस्तानी प्रतिनिधि अपने ही लोगों से किए गए वादों के लिए जवाबदेही से नहीं बच पाएंगे। उन्होंने कहा कि मेरे देश के खिलाफ झूठे आरोपों की उसी पुरानी सूची को बार-बार दोहराने से पाकिस्तानी प्रतिनिधि उन वादों से बरी नहीं हो जाएंगे जो उन्होंने अपने लोगों से किए हैं और जिन्हें पूरा करने का उनका कोई इरादा नहीं है।

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