पीएम मोदी और पुतिन, फोटो (सो.सोशल मीडिया) 
विदेश

आखिर क्या है EAEU? जिस पर पुतिन जल्द साइन करना चाहते हैं... अमेरिका तक बढ़ी हलचल

India EAEU Trade Deal: पुतिन की भारत यात्रा के दौरान ईएईयू के साथ तरजीही व्यापार समझौते पर जोर बढ़ गया है। यह डील भारत के व्यापार को नई रफ्तार देगी और अमेरिकी टैरिफ को बड़ा झटका पहुंचा सकती है।

अमन उपाध्याय

US Tariffs Impact India: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा इस बार वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज़ से बेहद अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि पुतिन भारत और यूरेशियाई आर्थिक संघ (EAEU) के बीच लंबे समय से लंबित तरजीही व्यापार समझौते (PTA) पर तेजी से काम आगे बढ़ाना चाहते हैं।

यह वही समझौता है, जो पूरा होते ही भारत के व्यापार को नई रफ्तार देगा और अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के असर को काफी हद तक कम कर देगा।

आर्थिक सहयोग के नए रास्ते

भारत ईएईयू के साथ इस समझौते का पहला दौर एक सप्ताह पहले पूरा कर चुका है। अब पुतिन चाहते हैं कि इस पर जल्द से जल्द हस्ताक्षर हों, ताकि आर्थिक सहयोग के नए रास्ते खुल सकें। पीएम मोदी और पुतिन की इस रणनीति से अमेरिका पहले ही सतर्क हो गया है, क्योंकि यह समझौता वाशिंगटन की आर्थिक नीतियों को सीधी चुनौती दे सकता है।

क्या है EAEU?

ईएईयू यानी यूरेशियाई आर्थिक संघ-रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कज़ाकिस्तान और किर्गिस्तान का एक आर्थिक ब्लॉक है। भारत का उद्देश्य इस ब्लॉक के साथ वस्तुओं, सेवाओं और पूंजी के मुक्त प्रवाह को आसान बनाना है। समझौते के बाद इन देशों के साथ व्यापार सरल हो जाएगा और भारत को एशियाई तथा यूरेशियाई बाज़ारों में बड़ी पहुंच मिलेगी। 20 अगस्त को भारत ने इस संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते के नियमों व शर्तों को अंतिम रूप दिया था। अब केवल हस्ताक्षर होने बाकी हैं।

भारत-रूस व्यापार नई ऊंचाई पर

फिलहाल भारत और रूस के बीच 70 अरब डॉलर का व्यापार होता है, जो 2030 से पहले 100 अरब डॉलर को पार करने वाला है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देशों की सरकारें और कारोबारी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पुतिन के अनुसार, ईएईयू समझौता इस दिशा में सबसे मजबूत कदम होगा। वस्तुओं, सेवाओं और पूंजी प्रवाह में आने वाली बाधाएं दूर होने पर व्यापार और निवेश दोनों में तेजी आएगी। रूस की कई कंपनियां भारत से उत्पाद खरीद बढ़ाने की तैयारी में हैं।

केवल ऊर्जा वार्ता नहीं, व्यापक साझेदारी लक्ष्य

पुतिन ने स्पष्ट किया कि उनकी भारत यात्रा केवल ऊर्जा समझौतों तक सीमित नहीं है। रूस तेल और गैस की आपूर्ति के बड़े अनुबंधों के साथ-साथ द्विपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत करना चाहता है। उन्होंने भरोसेमंद भुगतान और बीमा व्यवस्था को मुक्त व्यापार समझौते के लिए अनिवार्य बताया।

रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और रूस के रिश्ते केवल व्यापारिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश औद्योगिक विकास और कृत्रिम मेधा (AI) के क्षेत्र में भी मिलकर काम करने की तैयारी कर रहे हैं। रूस ने एआई सेक्टर में बड़ी प्रगति की है, जिसका लाभ भारत को मिलने वाला है।

अमेरिका क्यों चिंतित है?

भारत और ईएईयू का यह समझौता अमेरिकी टैरिफ कदमों की काट साबित हो सकता है। ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति से भारत को नुकसान हो रहा था, लेकिन यह नई साझेदारी एक वैकल्पिक आर्थिक नेटवर्क खड़ा कर देगी। यही वजह है कि वॉशिंगटन इस विकास पर नजर गड़ाए हुए है।

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