Hiroshima Day History And Facts: 6 अगस्त 1945 का दिन मानव इतिहास में सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक के रूप में दर्ज है। इस दिन अमेरिकी बी-29 बमवर्षक एनोला गे ने जापान के हिरोशिमा शहर पर परमाणु बम गिराया था। हिरोशिमा दिवस इतिहास की बात करें तो इस हमले ने शहर को पल भर में तबाह कर दिया था। इस विनाशकारी घटना में 140,000 से अधिक निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी।
इस परमाणु हथियार को लिटिल बॉय नाम दिया गया था जिसकी मारक क्षमता 15 किलोटन टीएनटी के बराबर थी। इस भयानक हमले के कारण तुरंत हजारों लोगों की मृत्यु हो गई थी और पूरा शहर जलकर राख हो गया था। हिरोशिमा दिवस इतिहास हमें यह याद दिलाता है कि परमाणु हथियारों के दुष्परिणाम कई पीढ़ियों तक बने रहते हैं। आज का दिन वैश्विक स्तर पर विश्व शांति और परमाणु निरस्त्रीकरण का संकल्प लेने का अवसर है।
6 अगस्त 1945 की सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर हिरोशिमा शहर पर पहला परमाणु बम गिराया गया था। अमेरिकी सेना के बी-29 बमवर्षक एनोला गे से गिराया गया लिटिल बॉय बम हवा में ही फट गया था। इस धमाके से उठे विशाल मशरूम क्लाउड और भीषण ऊर्जा ने शहर के मध्य भाग को राख में बदल दिया। शहर की अधिकतर इमारतें पूरी तरह से जमींदोज हो गईं और चारों तरफ केवल विनाश का मंजर था।
परमाणु विस्फोट के स्थान पर तापमान लगभग 4,000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। इस भयंकर गर्मी के कारण हजारों लोग पल भर में भाप बनकर उड़ गए थे। इसके बाद हुई रेडियोधर्मी वर्षा ने जीवित बचे लोगों को भी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त कर दिया। परमाणु विकिरण के कारण कई वर्षों तक लोग कैंसर, ल्यूकेमिया और अन्य गंभीर शारीरिक समस्याओं से पीड़ित रहे।
इस त्रासदी में वर्ष 1945 के अंत तक लगभग 140,000 लोगों की मृत्यु हो गई थी, जिनमें ज्यादातर नागरिक थे। इसके ठीक तीन दिन बाद 9 अगस्त 1945 को नागासाकी पर फैट मैन नामक परमाणु बम गिराया गया था। इन दो बड़े हमलों के बाद जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया और द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ। हालांकि इस जीत की कीमत मानवता ने बहुत बड़ी तबाही के रूप में चुकाई थी।
हिरोशिमा दिवस का मुख्य उद्देश्य दुनिया को परमाणु हथियारों के विनाशकारी प्रभाव के प्रति जागरूक करना है। हिरोशिमा पीस मेमोरियल पार्क में प्रतिवर्ष शांति घंटी बजाकर लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह दिन सभी देशों को आपसी विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की सीख देता है।