WHO On Hantavirus Outbreak: कोरोना महामारी की यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि 'हंतावायरस' ने वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों की नींद उड़ा दी है। हाल ही में दक्षिण अटलांटिक में मौजूद एक क्रूज शिप पर हंतावायरस के प्रकोप के कारण 3 यात्रियों की मौत की खबर सामने आई है।
इस घटना के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्थिति पर पैनी नजर रखते हुए अलर्ट जारी किया है। वर्तमान में यह जहाज स्पेन के कैनरी आइलैंड्स पर खड़ा है और संक्रमितों को पूरी तरह आइसोलेट कर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, क्रूज शिप पर अब तक हंतावायरस के कुल 8 मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें से 3 लोगों ने दम तोड़ दिया है। यात्रियों में शुरुआती तौर पर बुखार और सांस लेने में भारी तकलीफ जैसे गंभीर लक्षण देखे गए थे। स्वास्थ्य विभाग इस बात को लेकर विशेष रूप से चिंतित है क्योंकि इस बार 'एंडिस वायरस' स्ट्रेन की पुष्टि हुई है। आमतौर पर यह वायरस चूहों से फैलता है लेकिन एंडिस स्ट्रेन के मामले में यह सीमित परिस्थितियों में एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैल सकता है। क्रूज शिप तेजी से बढ़ता संक्रमण इसी का मुख्य कारण माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, हंतावायरस सीधे इंसान के फेफड़ों और किडनी को नुकसान पहुंचाता है और इसके शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे होने के कारण लोग अक्सर इसे पहचान नहीं पाते। इसमें तेज सिरदर्द और बदन दर्द के साथ ठंड लगती है लेकिन बीमारी बढ़ने पर फेफड़ों में पानी भर जाता है जिससे सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए समय रहते इसके लक्षणों को पहचानकर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जान बचाने के लिए बेहद जरूरी है।
बढ़ते डर के बीच, WHO के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेसियस ने जनता से शांत रहने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि हंतावायरस की तुलना कोविड-19 से करना सही नहीं है। डॉ. टेड्रोस के अनुसार, पब्लिक हेल्थ के लिए इसका वर्तमान खतरा काफी कम है और यह कोरोना की तरह बड़े स्तर पर फैलने वाली महामारी का रूप नहीं लेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि संक्रमण को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और जहाज पर मौजूद अन्य यात्री फिलहाल सुरक्षित हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण इंसानों और चूहों का संपर्क बढ़ रहा है। बढ़ती गर्मी के चलते ये जीव नए ठिकानों की तलाश में जहाजों और इंसानी बस्तियों तक पहुंच रहे हैं, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ा है।
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फिलहाल इस वायरस के लिए कोई सटीक वैक्सीन या एंटी-वायरल इलाज उपलब्ध नहीं है। बचाव का एकमात्र तरीका साफ-सफाई रखना और चूहों के संपर्क से बचना है। यदि कोई संक्रमित होता है तो उसे तुरंत ICU और ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता होती है।