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G4 देशों ने UNSC में सुधार की मांग दोहराई, संयुक्त बयान जारी कर कहा- 80 साल पुराना ढांचे में हो बदलाव

UNSC Reform: जी4 दोशों ने UNCS में सुधार की मांग के लिए संयुक्त बयान जारी किया है। उनका कहना है कि 80 साल पुराना यह ढांचा अब मौजूदा भू-राजनीतिक हकीकत को नहीं दर्शाता है।

नितिन कुमार राय

G4 Nations Call UNSC Reform: G4 देशों ने यूएन सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए संयुक्त बयान जारी किया है। ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान ने UN सुरक्षा परिषद में सुधार की दिशा में कोई प्रगति न होने पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि 80 साल पुराना यह ढांचा अब मौजूदा भू-राजनीतिक हकीकत को नहीं दर्शाता है। मंगलवार को UN महासभा के 81वें सत्र के दौरान हुई एक बैठक के बाद जारी संयुक्त मंत्री-स्तरीय बयान में इन चारों देशों ने कहा कि सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपनी मुख्य जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाने में असमर्थ है।

न्यूयॉर्क में नेताओं की मुलाकात

G4 देशों के विदेश मंत्री, ब्राजील के विदेश मंत्री श्री मौरो विएरा, जर्मनी के विदेश मामलों के संघीय मंत्री डॉ. जोहान डेविड वाडेफुल, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और जापान के विदेश मंत्री श्री मोटेगी तोशिमित्सु 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) महासभा के 81वें सत्र के दौरान मिले। जारी बयान में कहा गया कि UNSC का प्रतिनिधित्व, वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता सवालों के घेरे में है।

बैठक के दौरान चर्चा हुई

G4 मंत्रियों ने UN महासभा के 80वें सत्र के दौरान UN सुरक्षा परिषद में सुधार के संबंध में अंतर-सरकारी वार्ता ढांचे में हुई चर्चाओं की समीक्षा की। उन्होंने UNSC सुधार की संभावनाओं को लेकर UN में मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भू-राजनीतिक माहौल के लगातार चुनौतीपूर्ण होते जाने के कारण, UNSC में सुधार पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। G4 मंत्रियों ने माना कि UNSC अभी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपनी मुख्य जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाने में असमर्थ है। उन्होंने पाया कि इसका एक मुख्य कारण आठ दशक पुराना ढांचा है।

जल्द से जल्द सुधार लाने की मांग

G4 मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि UNSC में सुधार को जल्द से जल्द लागू करना बहुत जरूरी है ताकि परिषद अपने मकसद के लिए काम कर सके और आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को सही ढंग से दर्शा सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि UNSC का स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार ऐसे सुधार के लिए अहम है और ज्यादातर सदस्य देश इस बात का समर्थन करते हैं। इस संदर्भ में, उन्होंने अफ्रीका, एशिया-प्रशांत, और लैटिन अमेरिका और कैरिबियन जैसे कम प्रतिनिधित्व वाले और बिना प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों और समूहों की इन दोनों श्रेणियों में भागीदारी बेहतर बनाने के महत्व को फिर से दोहराया।

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