चीन के पूर्व प्रधानमंत्री झू रोंगजी का निधन  (सोर्स- सोशल मीडिया)
विदेश

चीन के पूर्व प्रधानमंत्री झू रोंगजी का 98 वर्ष की आयु में निधन, आर्थिक सुधारों के जनक

Zhu Rongji Death: चीन के पूर्व प्रधानमंत्री झू रोंगजी का 98 वर्ष की आयु में बीमारी के चलते बीजिंग में निधन हो गया है, जिन्होंने अपने आर्थिक सुधारों से देश को एक बड़ी वैश्विक शक्ति बनाया।

प्रिया सिंह

Former Premier Zhu Rongji: चीन के पूर्व प्रधानमंत्री झू रोंगजी का बुधवार सुबह ग्यारह बजे बीजिंग में बीमारी के कारण निधन हो गया है। वह 98 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह गए, जिससे देश में शोक की लहर है। चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ ने इस दुखद खबर की पुष्टि की है।

रोंगजी को चीन के आर्थिक विकास में तेजी लाने और उसे एक वैश्विक महाशक्ति बनाने का मुख्य श्रेय दिया जाता है। उन्होंने अपने साहसिक फैसलों से देश की दिशा को पूरी तरह बदल दिया था। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार अपने देश को आर्थिक शक्ति बनाने में उन्होंने बहुत बड़ा योगदान दिया था।

चीन को डब्लूटीओ में शामिल कराना

झू रोंगजी ने 1990 के दशक में चीन के सरकारी उद्योगों में कई बड़े और साहसिक परिवर्तन किए थे। उन्होंने ही चीन को विश्व व्यापार संगठन यानी डब्लूटीओ में शामिल कराया था। उनके इन ऐतिहासिक सुधारों की वजह से चीन के आर्थिक विकास को एक जबरदस्त गति मिल सकी थी।

डेंग शियाओपिंग के 1979 के सुधारों को आगे बढ़ाते हुए रोंगजी ने चीन को दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक देश बना दिया। इनके सुधारों से वर्ष 2000 से 2010 के बीच देश की विकास दर आठ प्रतिशत से ऊपर बनी रही, जो साल 2007 में 14.2 प्रतिशत के अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी।

सख्त प्रशासक और भ्रष्टाचार के धुर विरोधी

साल 1998 में 69 वर्ष की आयु में चीन के प्रधानमंत्री बनने वाले झू रोंगजी अपने सख्त अंदाज के लिए जाने जाते थे। वे सरकारी भ्रष्टाचार के धुर विरोधी थे। भ्रष्टाचार की आलोचना करने और सरकारी नाकामियों की जिम्मेदारी खुद लेने के कारण वे जनता के बीच काफी लोकप्रिय हुए थे।

अपने कड़े रवैये के कारण उन्हें 'बॉस' और 'झू फेंगजी' यानी पागल झू जैसे उपनामों से पुकारा जाता था। वे देश के सुधारों को बिना किसी समझौते के लागू करते थे। उनके इसी सख्त और बेबाक अंदाज के कारण उन्हें पूरे देश में कड़ा सम्मान और लोकप्रियता प्राप्त हुई थी।

निर्वासन से प्रधानमंत्री पद तक का सफर

झू रोंगजी का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा और उन्हें कई कड़े संघर्षों का सामना करना पड़ा था एक समय दूसरे कम्युनिस्ट देशों में सुधारों की तारीफ करने पर उन्हें पार्टी विरोधी मानकर ग्रामीण क्षेत्रों में निर्वासित कर वहां कठिन शारीरिक श्रम करने के लिए मजबूर किया गया था।

लेकिन अपने संकल्प के कारण वे वापस लौटे और साल 1998 से 2003 तक चीन के प्रधानमंत्री रहे। उनके निधन से चीन ने अपना एक महान नायक खो दिया है। हालांकि, पिछले महीने आई आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार चीन की विकास दर तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।

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