

Monsoon Session Last Day: आज यानी गुरुवार 13 अगस्त को संसद में मानसून सत्र का आखिरी दिन है, लेकिन संसद में हंगामा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। विपक्ष सरकार के खिलाफ संसद में विरोध कर रहा है और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग रहा है।
इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिख नीट पेपर लीक पर चर्चा के लिए समय तय करने का आग्रह किया। उस दौरान पूरे समय सदन में मौजूद रहकर विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने का आश्वासन दिया। हालांकि स्पीकर ने दोपहर तीन बजे के बाद सदन गुरुवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने जा रहा है। इस दौरान कुल 19 बैठकें होनी थी जो कि हंगामे में ही निकल गया। मानसून सत्र में भले ही भारी हंगामा हुआ, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बिल पास हुए। मानसून सत्र के दौरान सरकार ने टैक्स, परीक्षा व्यवस्था, बैंकिंग रिकॉर्ड्स, MSME, जन्म-मृत्यु पंजीकरण और सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या जैसे कई विधेयकों को लाया।
12 अगस्त तक के संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, मानसून सत्र के दौरान अब तक कुल 12 बिल सदन में लाए गए, जिसमें से 7 बिल दोनों सदनों से पारित हुए। इन 7 बिलों में से सिर्फ 2 पर ही विस्तार से चर्चा हुई। जबकि बाकी बिल विपक्ष के हंगामे और विरोध के बीच ही पारित कर दिए गए। जो बिल पास हुए हैं, उनमें
सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक
राष्ट्रीय सम्मान
जन्म-मृत्यु पंजीकरण
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या
टैक्सेशन
एमएसएमई भुगतान व्यवस्था
बैंकर्स बुक्स से जुड़े कानून शामिल हैं।
हालांकि, इस सत्र के दौरान दो बिल ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ एक सदन ने पास किया है। जिनमें ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल, केरल (नाम में बदलाव) बिल और नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (संशोधन) बिल शामिल हैं। ये बिल आज राज्यसभा में पेश किए जा सकते हैं। अब यह आशंका जताई जा रही है कि अन्य मुद्दों और बिल पर चर्चा के लिए सरकार विशेष सत्र बुला सकती है।
उधर, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शाह के पत्र को लेकर सदन के बाहर पलटवार किया। इससे पहले लोकसभा और राज्यसभा में हंगामे के बीच एफसीआरए बिल जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। जेपीसी में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सांसद शामिल होंगे। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि चूंकि कांग्रेस विधेयक को जेपीसी के समक्ष पेश करने की मांग कर रही है, इसलिए सरकार ने विपक्ष की मांग स्वीकार कर ली है।
सदन के बाहर अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब से संसद सत्र शुरू हुआ है तब से मैं कोई चैंबर में बैठता हूं। चूंकि विपक्ष सदन को चलने नहीं दे रहा है तो जाकर क्या करेंगे? जहां तक चर्चा का सवाल है, सरकार की ओर से किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया है कि हम छात्र आंदोलन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए तैयार हैं।
समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए। मैंने भी कह दिया मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के कि लिए तैयार हूं लेकिन वो चर्चा ही नहीं होने देना चाहते हैं। वो स्पीकर को पत्र दें और गुरुवार 3 बजे तक हम चर्चा के लिए तैयार है। मैं सदन में बैठूंगा और सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। अब विपक्ष को तय करना है कि उनको चर्चा करनी है या हंगामा करना है।
अमित शाह के जवाब के बाद राहुल गांधी ने एक पोस्ट में लिखा, जब किसी व्यक्ति में सच बोलने की हिम्मत नहीं होती तो उसकी चुप्पी ही उसकी बात कह देती है। अमित शाह की चुप्पी ही उनका कबूलनामा है। राहुल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि विपक्ष ने साफ कहा है कि हमें अमित शाह का बयान सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है।
जब मैं 'हम' कहता हूं तो मेरा मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। छात्रों पर गोली किसने चलाई? कील लगीं लाठियों से छात्रों को पीटने का आदेश किसने दिया? क्या हमारे बच्चों पर गोली चलाने का आदेश अमित शाह ने दिया था? अगर उन्होंने ऐसा किया है तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। पिछले 20 दिनों से अमित शाह गायब हैं। भारत के गृह मंत्री में हिम्मत नहीं है। वे सदन में नहीं आ सकते।