अयातुल्ला अली खामेनेई (फोटो- AI) 
विदेश

मौत से डरे खामेनेई! मोबाइल बंद कर बंकर में घुसे, बाहर तैनात की स्पेशल यूनिट

अमेरिकी सेना ने ईरान में तीन परमाणु स्थलों पर बमबारी की है। इनमें फोर्डो में गहरे भूमिगत यूरेनियम संवर्धन ईकाई भी शामिल है। बताया जा रहा है कि इसके बाद ही खामेनेई को बंकर में शिफ्ट किया गया।

अभिषेक सिंह

तेहरान: बढ़ते खतरों के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई को बेहद सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। तेहरान के अधिकारियों ने यूके टेलीग्राफ को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि खामेनेई की सुरक्षा अब एक गुप्त और विशेष इकाई द्वारा की जा रही है। इसमें शामिल अंगरक्षकों की कड़ी जांच की जाती है।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब खामेनेई के खिलाफ आंतरिक खतरों और शासन परिवर्तन की चर्चाएं गर्म हैं। इजरायली खुफिया एजेंसियों द्वारा उनके शासन के भीतर घुसपैठ की भी संभावना है। 86 वर्षीय नेता 1989 से ईरान पर शासन कर रहे हैं।

बंकर में शिफ्ट हुए खामेनेई

21 जून को ईरान-इजरायल युद्ध में अमेरिका के शामिल होने के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी सेना ने ईरान में तीन परमाणु स्थलों पर बमबारी की है। इनमें फोर्डो में गहरे भूमिगत यूरेनियम संवर्धन ईकाई भी शामिल है। बताया जा रहा है कि इसके बाद ही खामेनेई को बंकर में शिफ्ट किया गया।

बंद कर लिया मोबाइल फोन

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हत्या किए जाने के डर से खामेनेई ने अपने भरोसेमंद सहयोगियों के साथ अपना संचार सीमित कर दिया है। उन्होंने मोबाइल समेत सभी इलेक्ट्रॉनिक संपर्क बंद कर दिए हैं, ताकि उनकी लोकेशन का पता लगाना नामुमकिन हो जाए।

खामेनेई को क्यों सता रहा डर?

हाल ही में हिजबुल्लाह के पेजर विस्फोट और इजरायल द्वारा 11 वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और 14 परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या ने चिंता बढ़ा दी है। इन घटनाओं ने खामेनेई की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है। इजरायल ने खुले तौर पर शासन परिवर्तन की मांग की है, जिसके लिए खामेनेई का जीवित रहना एक बाधा माना जा रहा है।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में कहा था कि खामेनेई की हत्या ईरान-इजरायल संघर्ष को समाप्त कर सकती है। उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर को निशाना बनाने की संभावना से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा, 'मैं विस्तार में नहीं जाऊंगा, लेकिन हमने उनके शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाया है।

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