डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी, फोटो (सो.सोशल मीडिया) 
विदेश

ट्रंप का ईरान को 1 महीने का अल्टीमेटम; नेतन्याहू से मिलते ही दी 'Phase 2' की चेतावनी, क्या शुरू होगा युद्ध?

Trump Warning Iran: डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइली पीएम नेतन्याहू से मुलाकात के बाद ईरान को परमाणु समझौते के लिए एक महीने की मोहलत दी है। समझौता न होने पर कठोर 'फेज 2' की चेतावनी दी गई है।

अमन उपाध्याय

Trump Iran Nuclear Deal Deadline: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद आक्रामक और निर्णायक रुख अपनाया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ व्हाइट हाउस में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के ठीक बाद, ट्रंप ने ईरान को परमाणु समझौते पर सहमति जताने के लिए सिर्फ एक महीने की समय सीमा दी है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि के भीतर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो अमेरिका 'Phase 2' लागू करेगा, जो ईरान के लिए अत्यधिक कठिन और बहुत दर्दनाक साबित हो सकता है।

परमाणु समझौते पर ट्रंप का कड़ा रुख

पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के साथ एक न्यायपूर्ण और अच्छा समझौता चाहते हैं लेकिन यह प्रक्रिया ज्यादा लंबी नहीं चल सकती। उन्होंने साफ किया कि हालांकि उनकी नेतन्याहू के साथ बातचीत काफी अच्छी रही और इजराइली पीएम स्थिति की गंभीरता को समझते हैं लेकिन अंतिम फैसला वाशिंगटन के हाथ में है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमें समझौता करना ही होगा नहीं तो कहानी अलग होगी। गौरतलब है कि ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2015 की न्यूक्लियर डील से बाहर निकल गए थे जिसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट और परमाणु संवर्धन को लेकर विवाद बना हुआ है।

समुद्र में बढ़ा तनाव

ट्रंप की इस कूटनीतिक चेतावनी के साथ-साथ अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान पर दबाव बनाने के लिए एक और एयरक्राफ्ट कैरियर कैरिबियन से मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है। यह सैन्य लामबंदी संकेत देती है कि अमेरिका केवल बातचीत की मेज पर ही नहीं बल्कि युद्ध के मैदान में भी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'फेज 2' में और भी कड़े आर्थिक प्रतिबंध या रणनीतिक सैन्य हमले शामिल हो सकते हैं, हालांकि ट्रंप ने अभी तक इसके विवरण साझा नहीं किए हैं।

भारत की चिंताएं और वैश्विक असर

मध्य पूर्व में इस बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत पर पड़ना तय है। खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता भारत के लिए आर्थिक और सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इसी क्षेत्र से आयात करता है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। साथ ही, इस क्षेत्र में रहने वाले लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी दिल्ली के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।

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