डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा स्थगित (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरान युद्ध में अकेले पड़े ट्रंप, NATO देशों ने दिया धोखा तो छलका दर्द, चीन दौरा भी टला, कहा- रिश्ते अच्छे पर..

US-Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान संकट के कारण चीन दौरा स्थगित किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका-चीन रिश्ते अच्छे हैं और वह शी जिनपिंग से मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

अक्षय साहू

Trump China Visit Postponed: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अपने प्रस्तावित चीन दौरे को स्थगित कर दिया। यह दौरा इस महीने के अंत में प्रस्तावित था, लेकिन ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण इसे टाला गया। ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह लगभग एक महीने या उससे कुछ ज्यादा समय में चीन का दौरा करेंगे। इस बात की जानकारी उन्होंने व्हाइट हाउस में प्रेस कांफ्रेंस मे दी। 

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि, “चीन के साथ हमारे कामकाजी रिश्ते बहुत अच्छे हैं, इसलिए हम यह दौरा लगभग पांच या छह हफ्तों में करेंगे।” दौरा टलने पर ट्रंप ने इसका महत्व कम करने की कोशिश करते हुए कहा कि वह शी जिनपिंग के साथ मिलने के लिए उत्सुक हैं।

मुझे चीन के साथ काम करने में कोई परेशानी नहीं

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “हम चीन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मुझे कोई परेशानी नहीं है। मैं राष्ट्रपति शी से मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं और मुझे लगता है कि वह भी मुझसे मिलने का इंतजार कर रहे हैं।” उन्होंने चीन के साथ व्यापारिक बातचीत की बार-बार प्रशंसा की है और कहा कि बेहतर रिश्तों से अमेरिका को लाभ होगा। यह ध्यान देने योग्य है कि सत्ता में आने से पहले ट्रंप ने चीन को एक बड़ा विरोधी बताया था और वादा किया था कि वह अमेरिका का पूरा ध्यान इस एशियाई शक्ति के मुकाबले पर लगाएंगे।

होर्मुज खुलवाने को लेकर तनाव

ट्रंप ने पहले संकेत दिया था कि उनका दौरा इस बात पर निर्भर करेगा कि चीन वॉशिंगटन की मदद करेगा या नहीं। यह मदद होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक आवाजाही को फिर से शुरू करने के लिए अपेक्षित थी। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बीजिंग में मंगलवार को कहा कि इस दौरे का होर्मुज जलडमरूमध्य में पोतों की आवाजाही से कोई लेना-देना नहीं है।

नाटो देशों पर भड़के ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) और अन्य सहयोगी देशों ने उनके आह्वान को खारिज कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि ईरान की सैन्य क्षमता पहले ही ध्वस्त हो चुकी है और अब उन्हें नाटो देशों या किसी अन्य की मदद की आवश्यकता नहीं है। ट्रंप ने कहा, “हमारे अधिकतर नाटो सहयोगियों ने अमेरिका को सूचित किया कि वे पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ हमारे सैन्य अभियान में शामिल नहीं होना चाहते, जबकि लगभग हर देश इस बात से सहमत है कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।”

उन्होंने नाटो के सहयोग की कमी पर टिप्पणी करते हुए कहा, “मुझे हैरानी नहीं है, क्योंकि मैं हमेशा नाटो को एकतरफा व्यवस्था मानता रहा हूं। हम हर साल इन देशों की सुरक्षा पर सैकड़ों अरब डॉलर खर्च करते हैं। हम उनकी रक्षा करते हैं, लेकिन जरूरत के समय वे हमारे लिए कुछ नहीं करते।” ट्रंप ने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया ने भी उनकी मदद के आह्वान को ठुकरा दिया।

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