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अमेरिकी ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई
फ्लोरिडा में एक रैली में अमेरिकी राष्ट्रपति ने बयान दिया
लिटिल एपिक फ्यूरी के बारे में ट्रंप में रैली में जिक्र किया
Middle East Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई है। शुक्रवार को फ्लोरिडा में आयोजित एक रैली के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ कर सकता है। यह नाम उन्होंने 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान विरोधी अमेरिकी सैन्य अभियान का जिक्र करते हुए लिया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ऐसी कार्रवाई कब और किस रूप में हो सकती है। उनके इस बयान ने मध्य-पूर्व में युद्ध दोबारा भड़कने की आशंका बढ़ा दी है।
डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले शुक्रवार को ही कहा था कि अमेरिका युद्ध को बहुत जल्दी खत्म कर सकता है, लेकिन सवाल यह है कि इसे तुरंत समाप्त किया जाए या धीरे-धीरे कमजोर पड़ने दिया जाए। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल का प्रवाह जारी है और अमेरिका को वह सब मिल रहा है जिसकी उसे जरूरत है। इससे पहले उन्होंने यह भी कहा था कि मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर कोई हमला नहीं होगा। ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि अगर अमेरिका और इजराइल दोबारा हमला करते हैं, तो ईरान खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अधिकारी यदोल्लाह जावानी ने भी चेतावनी दी कि अगर ईरानी बुनियादी ढांचे पर हमला होता है, तो होर्मुज के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबल निशाने पर हो सकते हैं। समुद्र के नीचे बिछी ये केबल दुनिया के करीब 99 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक को संभालती हैं।
होर्मुज से अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ का हिस्सा बहुत कम है, लेकिन कई केबल कटने से इंटरनेट स्पीड धीमी हो सकती है। इससे वित्तीय लेनदेन, ऑनलाइन कारोबार और क्लाउड सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। युद्ध की स्थिति में इनके मरम्मत का काम भी बेहद मुश्किल हो जाएगा। इस बीच कई देशों ने नई सैन्य कार्रवाई से बचने की अपील की है।
इस्तांबुल में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब और इटली के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि नया हमला तनाव बढ़ाएगा और युद्ध पूरे क्षेत्र में फैल सकता है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने चेतावनी दी कि तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है। जर्मनी ने भी कूटनीति का रास्ता अपनाने पर जोर दिया।
ईंधन की कीमतें पहले से बढ़ रही हैं और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर दबाव साफ दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई सैन्य कार्रवाई की स्थिति में न सिर्फ मध्य-पूर्व, बल्कि वैश्विक बाजार भी प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन ट्रंप के बयान और ईरान की तैयारियों ने स्थिति को फिर से संवेदनशील बना दिया है।