सांकेतिक फोटो ( सो. सोशल मीडिया ) 
विदेश

भारतीय मूल के व्यक्ति को मौत की सजा पर रोक, इस देश के नए कानून ने दिलाई राहत की सांस

Relief under new law in Singapore: सिंगापुर में मौत की सजा पाए भारतीय मूल के मलेशियाई नागरिक को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने फिलहाल उसकी फांसी पर रोक लगा दी है। अब नए कानून के तहत इस मामले की पुनः समीक्षा की जाएगी।

अमन उपाध्याय

नवभारत इंटरनेशनल डेस्क: सिंगापुर में मौत की सजा पाए भारतीय मूल के एक मलेशियाई नागरिक को बड़ी राहत मिली है। सिंगापुर में लागू हुए नए कानून के तहत फिलहाल उसकी सजा पर रोक लगा दी गई है। अब इस मामले की दोबारा समीक्षा की जाएगी, जिसमें नए कानून के अनुसार सजा पर पुनर्विचार होगा।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सिंगापुर के इस नए कानून में यह स्पष्ट किया गया है कि मृत्युदंड की सजा सभी अपीलों के समाप्त होने के बाद ही लागू की जा सकती है।

चल रही थी फांसी की तैयारियां

सिंगापुर के एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, पन्नीर सेल्वम प्रंथमन को 2017 में 51.84 ग्राम हेरोइन की तस्करी के आरोप में दोषी ठहराया गया था और अनिवार्य रूप से मौत की सजा सुनाई गई थी। उसकी फांसी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन नए कानून के तहत फिलहाल इस पर रोक लगा दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रंथमन को गुरुवार को फांसी दी जानी थी, लेकिन अपीलीय अदालत ने उसकी याचिका पर सुनवाई के लिए सजा पर अस्थायी रोक लगा दी है। विदेश की अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें… 

सजा पर अस्थायी रोक लगी

सिंगापुर के अखबार 'द स्ट्रेट टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, पन्नीर सेल्वम प्रंथमन को 2017 में 51.84 ग्राम हेरोइन की तस्करी के आरोप में दोषी ठहराया गया था और अनिवार्य रूप से मौत की सजा सुनाई गई थी। उसकी फांसी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन नए कानून के तहत फिलहाल इस पर रोक लगा दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रंथमन को गुरुवार को फांसी दी जानी थी, लेकिन अपीलीय अदालत ने उसकी याचिका पर सुनवाई के लिए सजा पर अस्थायी रोक लगा दी है।

दी गई संवैधानिक चुनौती

न्यायमूर्ति वू बिह ली ने अपने फैसले में कहा कि उन्होंने प्रंथमन की सजा के अमल पर रोक लगा दी है। यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक कि उनके पूर्व वकील के खिलाफ लॉ सोसायटी में दर्ज शिकायत का निपटारा नहीं हो जाता और मादक पदार्थों के दुरुपयोग अधिनियम के तहत दी गई संवैधानिक चुनौती का परिणाम सामने नहीं आ जाता। गौरतलब है कि सजायाफ्ता व्यक्ति ने अदालत में अपने तर्कों को संवैधानिक आधार पर चुनौती दी है।

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