Ajit Doval China Border Peace: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग के बीच बीजिंग में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया।
दोनों पक्षों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चल रहे सीमा गतिरोध को कूटनीतिक बातचीत के जरिए कम करने पर सहमति जताई है। इस मुलाकात से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल तेज है और रणनीतिक विशेषज्ञ इस संवाद को बड़ा सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।
भारतीय दूतावास के अनुसार, अजित डोभाल की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को पुनः पटरी पर लाना है। दोनों पड़ोसी देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बनी सहमति के आधार पर आपसी आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुए सैन्य संघर्ष के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव रहा है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में दोनों ही पक्षों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव कम करने और परस्पर विश्वास बहाली के लिए कई कदम उठाए हैं।
बीजिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का यह दौरा चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ होने वाली विशेष कूटनीतिक वार्ता के लिहाज से अहम है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए स्थापित विशेष प्रतिनिधि तंत्र वर्ष 2003 से कार्यरत है, जो बातचीत का सबसे बड़ा माध्यम है।
इस मंच के जरिए दोनों देशों के राजनयिक सीमावर्ती इलाकों में गश्ती से जुड़े विवादों को आपसी बातचीत के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करते हैं। इस वार्ता में वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े विभिन्न संवेदनशील सुरक्षा मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, अजित डोभाल की इस सफल चीन यात्रा को आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों से भी सीधे जोड़कर देखा जा रहा है। इस साल सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत का दौरा कर सकते हैं।
इस संभावित दौरे से पहले सुरक्षा के स्तर पर चल रही यह बातचीत सीमा पर तनाव को समाप्त करने में काफी मददगार होगी। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों देशों के बीच शुरू हुआ यह रचनात्मक संवाद द्विपक्षीय संबंधों को क्या नई दिशा देता है।