भारत पर हमले का ड्रैगन को गर्व, फोटो (सो.सोशल मीडिया) 
विदेश

मुनीर का दीवाना हुआ चीन! भारत पर हमले का ड्रैगन को गर्व, पाकिस्तान की थपथपाई पीठ

पाकिस्तान एयरफोर्स प्रमुख एयर मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू और चीन के वायुसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वांग गांग के बीच मुलाकात हुई। बैठक के बाद जारी बयान में पाकिस्तानी वायुसेना की सराहना की गई।

अमन उपाध्याय

भारत के खिलाफ हालिया सैन्य टकराव के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया समीकरण उभरता दिखाई दे रहा है। चीन अब न केवल पाकिस्तान की खुले तौर पर सराहना कर रहा है, बल्कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग भारत के लिए रणनीतिक रूप से और ज्यादा मुश्किलें खड़ी कर रहा है।

चीन के एयरफोर्स प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वांग गांग और पाकिस्तान एयरफोर्स चीफ एयर मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू की मुलाकात के बाद बीजिंग से जारी आधिकारिक बयान में कई अहम संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वांग ने पाकिस्तानी पायलटों की "बहादुरी और अनुशासन" की सराहना की और भारत के खिलाफ उनके प्रदर्शन को "एक आदर्श उदाहरण" बताया।

तीन अलग-अलग मोर्चों पर जूझना पड़ा

भारत के उपसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने हाल ही में दिए एक अहम बयान में कहा कि 7 से 10 मई के बीच भारत को एक साथ तीन अलग-अलग मोर्चों पर जूझना पड़ा। एक ओर पाकिस्तान सीधे संघर्ष में शामिल था, दूसरी ओर चीन परोक्ष रूप से पर्दे के पीछे से सक्रिय था, जबकि तुर्की पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति कर रहा था।

जनरल सिंह के मुताबिक, चीन ने अपने उपग्रहों के जरिए भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रखी और यह संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान के साथ साझा की। उन्होंने चीन की रणनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजिंग हमेशा की तरह इस बार भी "दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर गोली चलाने" की चाल अपनाता दिखा खुद सामने आए बिना भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

चीन ने फैलाया झूठा प्रचार

इसी दौरान एक फ्रांसीसी खुफिया रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच हुए टकराव के बाद चीन ने एक सुनियोजित प्रचार अभियान चलाया, जिसका उद्देश्य फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमानों की छवि को खराब करना था।

एपी (एसोसिएटेड प्रेस) द्वारा देखी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने खासतौर पर इंडोनेशिया जैसे संभावित खरीददार देशों में अपने दूतावासों और रक्षा अधिकारियों को यह निर्देश दिए कि वे राफेल की क्षमताओं पर संदेह जताते हुए, चीनी लड़ाकू विमानों को उससे बेहतर विकल्प बताकर प्रचार किया गया। यह अभियान उस समय शुरू किया गया, जब भारत के पास मौजूद राफेल जेट्स ने एक टकराव की स्थिति में अहम भूमिका निभाई थी और उनकी वैश्विक प्रतिष्ठा व मांग तेजी से बढ़ रही थी।

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