Canada Permit Drop Visa Decline: कनाडा में स्टडी परमिट में कमी के कारण अब कनाडा अंतरराष्ट्रीय छात्रों की पहली पसंद नहीं रहा है। साल 2025 में कनाडा जाने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में ऐतिहासिक रूप से भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा कोविड काल से भी 18 फीसदी नीचे चला गया है जो कनाडा के शिक्षा जगत के लिए एक बहुत ही बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
कनाडा सरकार के इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के हालिया आंकड़ों ने सबको पूरी तरह से चौंका दिया है। पूरे साल 2025 में कनाडा ने दुनिया भर के छात्रों के लिए केवल 75,372 नए स्टडी परमिट ही मंजूर किए हैं। यह पिछले साल 2024 की तुलना में 64 फीसदी की एक बहुत ही बड़ी और भारी गिरावट है।
कनाडा सरकार ने हाउसिंग और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव को कम करने का तर्क देकर कड़े नियम बनाए। विदेशी छात्रों की भारी संख्या नियंत्रित करने के लिए सरकार ने साल 2024 में स्टडी परमिट पर कड़ा कैप लगाया था। इसके साथ ही निजी कॉलेजों पर भी कनाडाई सरकार ने अपनी कड़ी निगरानी काफी ज्यादा बढ़ा दी थी। अप्लाईबोर्ड की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 में केवल 2.11 लाख नए परमिट आवेदन प्रोसेस किए गए हैं। यह संख्या पिछले साल 2024 के कुल आवेदनों के मुकाबले पूरे 55 फीसदी तक कम है। साल 2021 में जहां 57.9 फीसदी आवेदन मंजूर होते थे वह साल 2025 में सिर्फ 35.7 फीसदी ही रह गए हैं।
कनाडा के ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट के अनुसार सरकार अपने स्टूडेंट कैप के भयानक असर का सही अनुमान नहीं लगा पाई। इमिग्रेशन विभाग को भी समझ नहीं आया कि स्टडी परमिट की मंजूरी दर एकाएक इतनी ज्यादा क्यों घट गई। हाउस ऑफ कॉमन्स की स्टैंडिंग कमेटी ने कहा कि इन कठोर नियमों से देश की वैश्विक छवि को भारी नुकसान पहुंचा है। समिति ने साफ तौर पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों को तेजी से सीमित करने की नीति जरूरत से ज्यादा ही व्यापक रही। इस नीति ने क्यूबेक जैसे क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को पूरी तरह से अनदेखा और नजरअंदाज कर दिया है। वहां छात्रों के पर्याप्त आवास की कोई समस्या नहीं थी फिर भी दाखिले बहुत ही बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं।
समिति के सामने गवाही देते हुए विशेषज्ञ एलेक्स अशर ने संघीय सरकार की इस खराब नीति पर अपना कड़ा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट बताया कि सरकार ने पूरे सिस्टम को समझे बिना ही सिर्फ छात्रों की संख्या घटाने पर अपना ध्यान केंद्रित किया। सरकारों और शिक्षण संस्थानों के बीच पर्याप्त संवाद नहीं हुआ जिससे बहुत ज्यादा बिना समन्वय के गलत फैसले लिए गए।
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समिति ने सरकार को कुल 10 अहम सिफारिशें दी हैं जिनमें शिक्षण संस्थानों के साथ व्यापक चर्चा का सुझाव मुख्य रूप से शामिल है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल इमिग्रेशन का मुद्दा नहीं बल्कि देश की लंबी आर्थिक रणनीति से जुड़ा अहम मामला है। अंतरराष्ट्रीय छात्र देश की अर्थव्यवस्था और इनोवेशन में एक बहुत बड़ी और अपनी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका हमेशा निभाते हैं।