ओटावा: कनाडा में नए राजनीतिक नेतृत्व के साथ ही देश की नीतियों में बदलाव की शुरुआत हो रही है। विदेश और सुरक्षा मामलों में भी नए बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कनाडा की नई सरकार वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत जैसे देशों के साथ मिलकर काम करेगी।
मार्क कार्नी ने 23 जून 1985 को हुए एयर इंडिया 'कनिष्क' विमान बम विस्फोट को भारत के इतिहास का सबसे भयावह आतंकवादी हमला बताया और इस घटना पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह हादसा उस वक्त हुआ जब विमान लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से केवल 45 मिनट की दूरी पर था। इस भयावह हमले में 268 कनाडाई नागरिकों समेत कुल 329 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। कार्नी ने कहा कि यह दर्दनाक घटना भारत और कनाडा के दिलों में आज भी ताजा है और इसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
यह बयान उस समय आया है जब एयर इंडिया फ्लाइट 182 हमले की 40वीं बरसी के मौके पर कनाडा में कई स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। हर साल की तरह इस बार भी पीड़ितों के परिजन और सरकारी अधिकारी विभिन्न स्मारक स्थलों पर एकत्र होकर हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक संदेश साझा करते हुए इस दर्दनाक घटना को याद किया। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया 182 का बम विस्फोट आतंकवाद के सबसे भयानक अध्यायों में से एक है, जो विश्व को यह चेतावनी देता है कि आतंकवाद के खिलाफ किसी भी प्रकार की नरमी नहीं दिखाई जानी चाहिए।
वर्तमान में, कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा आतंकवाद के विरोध में दिए गए बयान को एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। हालांकि, यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कनाडा के इस बदले हुए रुख से खालिस्तानी गतिविधियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हो पाएगी।