बांग्लादेश पुलिस कस्टडी में हिंदू नेता की मौत (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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बांग्लादेश पुलिस बनी जल्लाद! कस्टडी में हिंदू नेता की मौत से मचा बवाल, परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

Bangladesh News: बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसा बढ़ रही है; हिंदू और अल्पसंख्यकों पर हमले, प्रलय चाकी की पुलिस हिरासत में मौत, परिवार ने जेल की लापरवाही का आरोप लगाया।

अक्षय साहू

Hindu leader dies in police custody in Bangladesh: बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसक घटनाओं में भारी वृद्धि देखी जा रही है, खासकर हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। इसी बीच बांग्लादेश के प्रसिद्ध हिंदू संगीतकार और आवामी लीग के वरिष्ठ नेता प्रलय चाकी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई, जिसके बाद उनके परिवार ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

बांग्लादेश में हाल के दिनों में कई हिंदुओं की बेरहमी से हत्या हुई है, लेकिन मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार इसे प्रोपेगंडा बताकर अनदेखा कर रही है। हालांकि, भारत समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसे यूनुस सरकार की विफलता बताया है।

पुलिस ने चाकी की मौत पर क्या कहा?

पुलिस का कहना है कि 60 वर्षीय प्रलय चाकी की मौत स्वाभाविक थी। पाबना जेल अधीक्षक मोहम्मद उमर फारूक ने बताया कि प्रलय कई स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे, जिनमें डायबिटीज और हृदय रोग शामिल थे। अधिकारी ने कहा कि उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ और उन्हें पहले पाबना जनरल अस्पताल और फिर राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां रविवार रात लगभग 9 बजे उनकी मौत हो गई।

परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

हालांकि, प्रलय के बेटे सोनी चाकी ने पुलिस की बातों को गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि उनके पिता को उस समय किसी भी मामले में नाम नहीं था, फिर भी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में उनकी हालत बिगड़ी, लेकिन अधिकारियों ने परिवार को सूचित नहीं किया। जब परिवार को यह जानकारी दूसरों से मिली, तब उन्होंने अस्पताल पहुंचकर इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिलीं, जिससे प्रलय की मौत हो गई।

छात्र आंदोलन के बाद हुई थी गिरफ्तारी

प्रलय चाकी को जुलाई 2024 में ढाका में हिंसक विरोध प्रदर्शन और छात्र आंदोलन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। 16 दिसंबर को पाबना के दिलालपुर स्थित उनके घर से उन्हें अचानक उठा लिया गया और बाद में गिरफ्तार बताया गया। उनके परिवार का आरोप है कि जेल प्रशासन की लापरवाही और चिकित्सीय सुविधाओं की कमी ने उनके पिता की जान ले ली।

इस घटना ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा और पुलिस हिरासत में मौत जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रलय चाकी की मौत ने देश में राजनीतिक और सामाजिक तनाव को और बढ़ा दिया है।

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