Bangladesh Pakistan Airspace Uranium Issue: बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट से सबसे ज्यादा फायदा पाकिस्तान का हुआ। इस घटनाक्रम से बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सुस्त पड़े रिश्तों को नई ऊर्जा मिली और देश की कट्टरपंथी ताकतों ने दशकों तक उनका शोषण करने वाले पाकिस्तानियों का बांहे खोलकर न सिर्फ स्वागत किया बल्कि राजधानी ढाका में जलसों का आयोजन किया। लेकिन पाकिस्तान ने एक बार फिर अपना असली चेहरा दिखा दिया है।
दरअसल बांग्लादेश अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट को संचालित करने के लिए रूस से यूरेनियम खरीदता है। पाकिस्तान ने हाल ही में बांग्लादेश को रूस से यूरेनियम की खेप लाने के लिए अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी। इससे यह साफ नजर आता है कि पाकिस्तान बांग्लादेश की तरक्की से न तो 1971 में खुश था न आज।
जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश के रूपपुर में स्थित न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए यूरेनियम की आपूर्ति रुक गई है, क्योंकि पाकिस्तान ने बांग्लादेश को यूरेनियम की खेप लाने के लिए अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी है। इस परमाणु प्लांट की यूनिट-2 के लिए परमाणु ईंधन रूस से 24 सितंबर को बांग्लादेश पहुंचना था। फिलहाल पावर प्लांट के अधिकारी यूरेनियम आपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं। अगर जल्द ही बांग्लादेश को यूरेनियम नहीं मिला तो यूनिट-2 को बंद करना पड़ सकता है।
बांग्लादेश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फकीर महबूब अनाम ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि हमें सूचना मिली थी कि रूपपुर न्यूक्लियर प्लांट के लिए यूरेनियम लेकर एक कार्गो प्लेन 24 सितंबर को बांग्लादेश पहुंचने वाला था। लेकिन पाकिस्तान ने अचानक इस प्लेन को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की इजाजत नहीं दी। इसलिए यूरेनियम तय समय पर बांग्लादेश नहीं पहुंच पाया। उन्होंने कहा कि हमें फिलहाल यह नहीं पता कि पाकिस्तान ने ऐसा क्यों किया। अनाम ने कहा कि हमें यूरेनियम पहुंचाने के लिए नई तारीख तय की गई है। रूस ने संकेत दिए हैं कि अक्टूबर के पहले हफ्ते में यूरेनियम बांग्लादेश पहुंच सकता है।
बांग्लादेश के रूपपुर में स्थित न्यूक्लियर पावर प्लांट को रूस की मदद से बनाया गया है। यह बांग्लादेश का पहला परमाणु बिजली प्लांट है। इसके निर्माण में रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम तकनीकी मदद दे रहा है और बांग्लादेश परमाणु ऊर्जा आयोग इसकी निगरानी कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, पावर प्लांट में तीसरी पीढ़ी के दो वीवीईआर-1200 रिएक्टर लगाए जा रहे हैं, जो 2,400 मेगावाट बिजली पैदा कर सकते हैं। इससे बांग्लादेश में बिजली की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।