तारिक रहमान, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
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बांग्लादेश चुनाव: क्या तारिक रहमान बचा पाएंगे जिया परिवार की विरासत? 'परिवारवाद' पर छिड़ी भीषण जंग

Bangladesh Elections: बांग्लादेश में आम चुनावों से पहले 'परिवारवाद' सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है। शेख हसीना की विदाई और BNP की चुनौतियों के बीच देश में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट है।

अमन उपाध्याय

Bangladesh Elections News In Hindi: बांग्लादेश की राजनीति एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव से पहले देश के राजनीतिक गलियारों में 'परिवारवाद' को लेकर बहस तेज हो गई है। दशकों तक बांग्लादेश की सत्ता दो शक्तिशाली परिवारों शेख हसीना की अवामी लीग और खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के इर्द-गिर्द घूमती रही है लेकिन इस बार समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

जमात-ए-इस्लामी का तीखा हमला

इस चुनावी बहस के केंद्र में कट्टर इस्लामिक पार्टी 'जमात-ए-इस्लामी' है जो खुलकर इस राजशाही परंपरा के अंत की वकालत कर रही है। राजशाही में एक चुनावी रैली के दौरान जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान ने बिना नाम लिए BNP पर हमला करते हुए कहा कि अब देश में ऐसी राजनीति नहीं चलेगी जहां शासक का बेटा ही अगला शासक बने। रहमान के अनुसार, भविष्य की राजनीति का आधार 'काबिलियत, ईमानदारी और देशभक्ति' होनी चाहिए न कि किसी परिवार का नाम। उन्होंने चेतावनी दी कि हिंसा और लालच भरे अतीत वाले लोगों को सत्ता सौंपना देश के लिए खतरनाक हो सकता है।

BNP के लिए अस्तित्व की लड़ाई

बांग्लादेश की राजनीति में परिवारवाद की जड़ें BNP और जिया परिवार से गहराई से जुड़ी हैं। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन के बाद अब पार्टी की कमान उनके बेटे तारिक रहमान के हाथों में है। तारिक रहमान हाल ही में 17 साल का लंबा समय लंदन में बिताने के बाद स्वदेश लौटे हैं और अपनी पार्टी को फिर से सत्ता में लाने की कोशिशों में जुटे हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि BNP इस बार चुनाव हार जाती है, तो देश में दशकों से चली आ रही फैमिली पॉलिटिक्स का अंत हो सकता है। ऐसी स्थिति में जमात-ए-इस्लामी और 11-पार्टी गठबंधन को सबसे अधिक लाभ होने की उम्मीद है।

मैदान से बाहर अवामी लीग

परिवारवाद का दूसरा सबसे बड़ा स्तंभ रही 'अवामी लीग' फिलहाल राजनीतिक मैदान से गायब है। 2024 के घटनाक्रम के बाद शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा और वर्तमान में अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा हुआ है जिससे वह 2026 के चुनावों में हिस्सा नहीं ले पाएगी। अवामी लीग की अनुपस्थिति और BNP की कमजोर पड़ती स्थिति ने पहली बार यह संकेत दिया है कि बांग्लादेश की राजनीति से परिवारवाद की पकड़ ढीली पड़ सकती है।

क्या सच में आएगा बदलाव?

हालांकि, जानकार यह भी चेतावनी देते हैं कि परिवारवाद केवल नेताओं के नाम से नहीं बल्कि राजनीतिक संस्कृति से जुड़ा होता है। सवाल यह है कि क्या नए उभरते दल सत्ता मिलने के बाद वास्तव में एक पारदर्शी और काबिलियत आधारित सिस्टम बनाएंगे या फिर वे भी पुराने ढर्रे पर ही चलेंगे। फिलहाल, बांग्लादेश के नागरिक एक ऐसे नए राजनीतिक दौर की उम्मीद कर रहे हैं जहां नेतृत्व का चुनाव 'विरासत' के बजाय 'योग्यता' के आधार पर हो।

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