बांग्लादेश में चुनाव प्रचार के दौरान फायरिंग (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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बांग्लादेश में चुनाव प्रचार के दौरान फायरिंग में पांच घायल, राजनीतिक हिंसा में बढ़ोत्तरी

Election Campaign Violence: बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में चुनाव प्रचार के दौरान हुई गोलीबारी में एक बच्चे सहित पांच लोग घायल हो गए। देश में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक हिंसा में वृद्धि हुई है।

प्रिया सिंह

Political Instability In Bangladesh: बांग्लादेश में होने वाले आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण और हिंसक होता जा रहा है। हाल ही में कॉक्स बाजार के टेकनाफ इलाके में प्रचार के दौरान अज्ञात हमलावरों ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं। इस हिंसक घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और स्वतंत्र चुनाव के आयोजन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने हिंसा के बढ़ते आंकड़ों पर चिंता जताते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है।

कॉक्स बाजार में हिंसक हमला

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार स्थित टेकनाफ उपजिला में गुरुवार रात अली खली रोहिंग्या कैंप इलाके में एक चुनावी सभा पर हमला हुआ। स्थानीय पुलिस के अनुसार अज्ञात हमलावरों ने उस समय गोलीबारी की जब एक ट्रक पर चुनाव प्रचार चल रहा था। इस अचानक हुए हमले में एक मासूम बच्चे सहित कुल पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों की पहचान के बारे में बताते हुए पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इसमें दो रोहिंग्या शरणार्थी और तीन स्थानीय बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। यह घटना रात के करीब साढ़े आठ बजे हुई जब वहां प्रचार वाहन के पास काफी भीड़ जमा हो गई थी। टेक्नाफ मॉडल पुलिस स्टेशन के ओसी मोहम्मद सैफुल इस्लाम ने इस पूरी घटना की आधिकारिक पुष्टि की है।

चुनावी हिंसा के आंकड़े

बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनावों से पहले हिंसा की घटनाओं में डराने वाली तेजी देखी जा रही है। मानवाधिकार संगठन 'ऐन ओ सालिश केंद्र' (ASK) की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी माह में राजनीतिक हिंसा के स्तर में काफी उछाल आया है। दिसंबर 2025 की तुलना में जनवरी 2026 में हताहत होने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है। रिपोर्टों से पता चलता है कि जनवरी के महीने में हिंसा की कुल 75 घटनाएं दर्ज की गईं जिनमें 616 लोग घायल हुए। इन हिंसक झड़पों में 11 लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक चिंताजनक संकेत है। वहीं दिसंबर 2025 में केवल 18 घटनाएं हुई थीं जिनमें 268 लोग घायल हुए और चार की मृत्यु हुई थी।

प्रचार शुरू होने के बाद बढ़ा तनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और 22 जनवरी से औपचारिक प्रचार शुरू होने के बाद स्थिति बिगड़ी है। केवल 21 से 31 जनवरी के बीच के छोटे अंतराल में ही 49 हिंसक झड़पें होने की जानकारी सामने आई है। इन दस दिनों की हिंसा में चार लोगों की मौत हुई और 414 अन्य लोग बुरी तरह घायल हुए हैं।

मतदान की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है देश में राजनीतिक अस्थिरता और संघर्ष की प्रवृत्ति और भी स्पष्ट होती जा रही है। एएसके के दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि इस हिंसा का शिकार अब पत्रकार भी बन रहे हैं। दिसंबर में जहां 11 पत्रकारों पर हमले हुए थे वहीं जनवरी में यह संख्या बढ़कर 16 हो गई है।

शांति और सुरक्षा की अपील

मानवाधिकार समूहों ने देश की वर्तमान स्थिति और बढ़ती हिंसा पर गहरा दुख और गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे संयम बरतें और अपने समर्थकों को शांति बनाए रखने का निर्देश दें। चुनाव के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और राजनीतिक दलों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

इसके साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों से भी आग्रह किया गया है कि वे बिना किसी भेदभाव के नागरिकों की रक्षा करें। संवैधानिक अधिकारों को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि सुरक्षा एजेंसियां हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। आने वाले चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाने के लिए सभी पक्षों का सहयोग बहुत आवश्यक है।

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