Nepal News In Hindi: काठमांडू महानगर पालिका के मेयर बालेन शाह ने मिथिला की पावन धरती जनकपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए क्षेत्र के विकास और पर्यटन को लेकर अपनी बड़ी दृष्टि साझा की है। उन्होंने माता जानकी और आंदोलनों के शहीदों को नमन करते हुए स्पष्ट किया कि वे केवल भाषण देने नहीं बल्कि 'काम करने' में विश्वास रखते हैं। बालेन ने जनकपुर की उपेक्षा पर सवाल उठाते हुए इसे विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने की अपील की।
बालेन शाह (बालेन्द्र शाह) का परिवार मूल रूप से महोत्तरी जिले (नेपाल का मिथिला क्षेत्र) से आता है। उनके पिता डॉ. राम नारायण शाह और उनका पूरा परिवार सनातनी परंपराओं का पालन करता रहा है। वे सार्वजनिक मंचों पर अक्सर 'जय जानकी' और 'जय मिथिला' के नारों का उपयोग करते हैं, जो उनकी अपनी संस्कृति और विरासत के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाता है। काठमांडू के मेयर बनने के बाद भी उन्होंने अपनी मैथिल पहचान को कभी ओझल नहीं होने दिया। नेपाल की राजनीति में मिथिला क्षेत्र का हमेशा से बड़ा योगदान रहा है और बालेन शाह जैसे युवाओं का उदय इस प्रभाव को और मजबूत कर रहा है।
बालेन शाह ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि दुनिया की सबसे प्रसिद्ध जोड़ी, राम-जानकी की विवाह स्थली होने के बावजूद, लोग डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए जयपुर या बाली (इंडोनेशिया) का रुख करते हैं। उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि मिथिला को एक आकर्षक डेस्टिनेशन और बेहतर व्यवस्थापन के रूप में विकसित क्यों नहीं किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जहां अयोध्या में करोड़ों पर्यटक आ रहे हैं, वहीं जानकी माता में अकेले 1 करोड़ पर्यटक लाने की क्षमता है, बशर्ते यहां का प्रबंधन और साफ-सफाई दुरुस्त हो।
प्रशासनिक ढांचे पर बात करते हुए बालेन ने कहा कि प्रदेशों को और अधिक शक्तिशाली बनाने की जरूरत है। उनके अनुसार, प्रदेश का काम केवल वार्डों में जाकर नल जोड़ना नहीं, बल्कि तीन-चार पालिकाओं को जोड़कर बड़े विकास कार्य करना होना चाहिए। उन्होंने इस बात की आलोचना की कि जनकपुर को प्रदेश की राजधानी होने के बावजूद अधिकारों के लिए काठमांडू की ओर देखना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि मेयर को जनता के बीच होना चाहिए, न कि केवल ऑफिस में बैठकर आंदोलनकारियों को मूक दर्शक बनकर देखना चाहिए।
यह भी पढ़ें:- मांस-हड्डी सब गला देता है… लेबनान पर इजरायल ने ये खतरनाक हथियार किया इस्तेमाल! 400 लोगों की हुई मौत
बालेन शाह ने काठमांडू महानगर में किए गए कार्यों को 'असली समाजवाद' बताया और इसे सातों प्रदेशों में लागू करने की बात कही। उन्होंने बताया कि काठमांडू में 20,000 छात्र महंगे कॉलेजों में मुफ्त शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और अस्पतालों में 10% बेड गरीबों के लिए आरक्षित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह का संरक्षण मिथिला के मंदिरों, पोखरों और सार्वजनिक संपत्तियों को भी मिलना चाहिए।
अंत में, उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) और उसके चुनाव चिह्न 'घंटी' का समर्थन करते हुए कहा कि सही समय आने पर 'घंटी' को वोट देकर सही लोग और सही सरकार सत्ता में आएगी। उन्होंने एक 'मधेशी प्रधानमंत्री' (मशिया पीएम) बनने के सपने और बदलाव की जरूरत पर भी जोर दिया।