जिंदा इंसान खाने वाला कीड़ा (फोटो- सोशल मीडिया) 
विदेश

अमेरिका में मिला जिंदा इंसान खाने वाला कीड़ा, 5000 से ज्यादा केस मिलने से हड़कंप, वैज्ञानिक परेशान

US News: न्यू वर्ल्ड स्क्रूवॉर्म एक खतरनाक परजीवी है, जो जिंदा इंसानों और जानवरों के घावों में मांस खाता है। अमेरिका में इसका पहला मामला सामने आने से वैज्ञानिकों में हड़कंप मच गया है।

अक्षय साहू

New World Screwworm: दुनियाभर के वैज्ञानिक इन दिनों परेशान चल रहे हैं, वजह है हाल ही में पाए गए एक कीड़ा जो जिंदा इंसानों को खाता है। मैक्सिको में अब तक इस तरह के 5000 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुकें है। वहीं अमेरिका में भी इसका पहला मामला सामने आया है। इससे पूरे अमेरिका में हड़कंप मच गया है।

इस परजीवी का नाम न्यू वर्ल्ड स्क्रूवॉर्म रखा गया है, इसे यह नाम इसकी बनावट की वजह से दिया है। दरअसल यह देखनें में स्क्रू की तरह नजर आता है। यह जिंदा इंसानों और जानवरों के घावों में घुसकर अंदर की मांसपेशियों को खाता है। अब तक इसे दक्षिण अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्रों में ही देखा गया था, लेकिन अब यह उत्तर की ओर फैल रहा है और अमेरिका के पशु उद्योग के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है।

खतरनाक साबित हो सकता है परजीवी

अमेरिका में स्क्रूवॉर्म संक्रमण का एक दुर्लभ मामला सामने आया है। 4 अगस्त को यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने मैरीलैंड स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर इसकी पुष्टि की। यह संक्रमण एक व्यक्ति में पाया गया जो हाल ही में एल सल्वाडोर की यात्रा से लौटकर आया था। CDC के अनुसार, स्क्रूवॉर्म एक दुर्लभ परजीवी है, लेकिन संक्रमण की स्थिति में यह अत्यधिक पीड़ादायक हो सकता है और यदि समय पर इलाज न मिले तो जानलेवा भी साबित हो सकता है।

न्यू वर्ल्ड स्क्रूवॉर्म आमतौर पर घाव या त्वचा के खुले हिस्से में अंडे देती है। इन अंडों से निकली लार्वा जीवित मांस को खाते हुए शरीर के अंदर की ओर बढ़ती है, जिससे गंभीर संक्रमण हो सकता है। जानवरों के मामलों में यह समस्या और भी व्यापक है, खासकर खेतों में पलने वाले मवेशियों में। मेक्सिको में स्क्रूवॉर्म के सबसे अधिक 5,086 मामले सामने आए हैं। जिनमें से 41 इंसानों में और बाकी पशुओं जैसे गाय, घोड़े, कुत्ते आदि में पाए गए हैं।

अमेरिका ने उठाए जरूरी कदम

अमेरिका के कृषि विभाग (USDA) ने एक बढ़ते खतरे से निपटने के लिए टेक्सास के एडिनबर्ग में एक नई "स्टेराइल फ्लाई प्रोडक्शन फैसिलिटी" स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस केंद्र में हर हफ्ते करीब 30 करोड़ बांझ नर मक्खियों का उत्पादन किया जाएगा। इन मक्खियों को रेडिएशन के माध्यम से बांझ बनाया जाएगा और फिर उन्हें वातावरण में छोड़ा जाएगा, ताकि वे मादा मक्खियों से संभोग तो करें, लेकिन प्रजनन न हो सके। इस तकनीक से पहले भी इस प्रकार के प्रकोप को रोगा गया है।

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