अल-अक्सा मस्जिद (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

मुस्लिमों का हक छिन रहे नेतन्याहू...अल-अक्सा मस्जिद पर 16 दिन से इजरायल ने लगाया ताला तो भड़के मुस्लिम देश

Israel-Iran War: ईरान युद्ध के बीच इजराइल ने रमजान में अल-अक्सा मस्जिद को 16 दिनों से बंद रखा है। इस कदम पर अरब लीग सहित कई मुस्लिम देशों और संगठनों ने कड़ी निंदा की।

अक्षय साहू

Arab League Criticize Israel to Al Aqsa Mosque Close: ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच इजरायल ने यरूशलम स्थित मुसलमानों के सबसे पवित्र स्थलों में से एक अल-अक्सा मस्जिद को पिछले 16 दिनों से बंद कर रखा है। रमजान के दौरान उठाए गए इस कदम पर कई मुस्लिम देशों में कड़ी नाराजगी देखी जा रही है। अरब लीग ने इस फैसले की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि इजरायल को मुसलमानों को मस्जिद में इबादत करने से रोकने का कोई अधिकार नहीं है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अरब लीग ने अपने बयान में कहा कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि यरूशलम के पवित्र स्थलों पर हो रही कथित अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए इजरायल पर दबाव डाला जाए।

सिक्स डे वॉर के बाद रमजान में सबसे लंबी बंदी

यह निर्णय उस समय लिया गया जब 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद से इजरायल ने कब्जे वाले पूर्वी यरूशलम में स्थित अल-अक्सा मस्जिद को बंद कर दिया। फिलिस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि 1967 में सिक्स डे वॉर के बाद पूर्वी यरूशलम पर इजरायल के नियंत्रण के बाद से रमजान के दौरान यह सबसे लंबी बंदी है। इसी तरह वेस्ट बैंक में स्थित इब्राहिमी मस्जिद में भी केवल लगभग 50 नमाजियों को ही इबादत की अनुमति दी जा रही है।

इजरायल ने सुरक्षा कारणों का दिया हवाला

इजरायल का कहना है कि क्षेत्र में युद्ध की स्थिति और सुरक्षा खतरों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। उसके अनुसार ईरान की ओर से संभावित मिसाइल हमलों का खतरा बना हुआ है। मस्जिद बंद होने से अल-अक्सा परिसर लगभग खाली पड़ा है और हजारों फिलिस्तीनी मुसलमानों को पुराने शहर की सड़कों और दीवारों के पास नमाज अदा करनी पड़ रही है। रमजान के आखिरी दस दिनों में मस्जिद बंद रहने से ‘लैलत अल-कद्र’ और ‘एतिकाफ’ जैसी अहम इबादतें भी प्रभावित हो रही हैं।

कई देशों और संगठनों की आलोचना

अरब लीग के अलावा कई मुस्लिम देशों और संगठनों ने भी इस फैसले की निंदा की है। मुस्लिम वर्ल्ड लीग, अल-अजहर और अफ्रीकी संघ सहित कई संस्थाओं ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। फिलिस्तीनी अथॉरिटी का कहना है कि यह 1967 के बाद रमजान में सबसे लंबी बंदी है, जबकि हमास ने इसे युद्ध की घोषणा जैसा कदम बताया है।

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