Afghans Searching For Gold River: अफगानिस्तान में भारी बेरोजगारी के बीच कुनार नदी में सोने की तलाश काफी तेज हो गई है। हजारों लोग अपने शहरों से दूर आकर इस मुश्किल काम में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पहाड़ों को काटकर और मिट्टी को छानकर ये लोग सोने के बहुत ही छोटे कण निकाल रहे हैं। विदेशी कंपनियों की नजर भी अब इस क्षेत्र में छिपे खजाने और खनन पर पड़ने लगी है।
Afghanistan के पूर्वी हिस्से में स्थित हिंदू कुश की पहाड़ियों में इन दिनों सोने की भारी तलाश चल रही है। Pakistan सीमा के पास बहने वाली कुनार नदी के किनारे अचानक से हजारों लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई है। अपनी गरीबी दूर करने के लिए लोग दिन-रात नदी के सूखे हिस्सों और पहाड़ों को खोदकर सोना निकालने में जुटे हुए हैं।
Afghanistan में छाई भीषण गरीबी और रोजगार के बड़े संकट के कारण लोग इस कठिन काम की ओर रुख कर रहे हैं। स्थिति इतनी खराब है कि लोग काबुल जैसे शहरों से अपनी पक्की नौकरियां छोड़कर 7 घंटे का लंबा सफर तय करके आ रहे हैं। यहां मिलने वाले सोने के कण गेहूं के दाने से भी छोटे हैं, फिर भी हजारों लोग फावड़ा लेकर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
सोना खोजने का यह पूरा तरीका बहुत ही देसी है और इसमें लोगों को दिन भर हाड़-तोड़ मेहनत करनी पड़ती है। सबसे पहले लोग कुदाल की मदद से ऊंचे पहाड़ों को काटते हैं और फिर उस मिट्टी को बोरियों में भरकर अपनी पीठ पर लादते हैं। नीचे लाने के बाद इस मिट्टी को छलनी पर रखा जाता है और फिर कुनार नदी के बहते पानी से इसे अच्छी तरह धोया जाता है।
इस खतरनाक और थकाऊ काम में पानी के बहाव से हल्की मिट्टी बह जाती है और लोहे की कड़ाही में सोने के कण बचते हैं। लगातार एक हफ्ते तक जी-जान से मेहनत करने के बाद एक मजदूर को बमुश्किल 1 ग्राम के करीब सोना मिल पाता है। स्थानीय बाजार में इस 1 ग्राम सोने की कीमत लगभग 8,000 अफगानी तक मिल जाती है, जो उनके लिए बड़ी रकम है।
आज कुनार नदी के किनारे काम करने वाले हर शख्स की आंखों में बस एक ही सुनहरा सपना पल रहा है। Afghanistan की जमीन के नीचे छिपे इन विशाल खजानों ने अब बड़ी विदेशी कंपनियों का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है। प्रशासन अब बड़े पैमाने पर माइनिंग को बढ़ावा देने की योजना बना रहा है ताकि देश की अर्थव्यवस्था को सुधारा जा सके।
इन उबड़-खाबड़ पहाड़ों के बीच ये मेहनती लोग सिर्फ इस उम्मीद में पसीना बहा रहे हैं कि उनकी तकदीर जल्द ही चमक जाएगी। लंबे समय से चला आ रहा यह सिलसिला पिछले कई दिनों से बिना रुके लगातार जारी है और भीड़ बढ़ती ही जा रही है। फिलहाल कुनार की इस पथरीली जमीन पर हर कोई अपनी मेहनत के भरोसे जिंदगी की नई शुरुआत करने का सपना देख रहा है।