सीएम ममता बनर्जी। इमेज-सोशल मीडिया  
पश्चिम बंगाल

क्या है ममता बनर्जी का ‘लक्ष्मी भंडार’? BJP के लिए बनी है बड़ी चुनौती

Women Votes: पश्चिम बंगाल में सीएम ममता बनर्जी की लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाएं विधानसभा चुनाव का समीकरण बदल रही हैं। इस विधानसभा चुनाव में यह बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

रंजन कुमार

Mamata Banerjee Schemes: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सीएम नीतीश सरकार ने महिलाओं को मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत 10,000 रुपए की सीधी आर्थिक मदद देनी शुरू की थी। इससे राज्य की राजनीति का मिजाज बदला। पहली बार बड़ी संख्या में महिलाओं ने जातिगत और परंपरागत राजनीतिक गणित से हटकर वोट किया। इस बदलाव ने बिहार में सत्ता संतुलन को प्रभावित किया। यह स्पष्ट किया कि महिला वोट अब सहायक नहीं, बल्कि निर्णायक राजनीतिक ताकत बन चुका है।

अब वैसी ही स्थिति पश्चिम बंगाल में बनती दिख रही है। यहां बीजेपी के एक राज्य समिति सदस्य का हालिया बयान वायरल होना पार्टी की अंदरूनी घबराहट को उजागर करता है। बयान का संकेत स्पष्ट है कि महिलाओं का झुकाव ममता की योजनाओं की तरफ बढ़ रहा और यही बीजेपी की सबसे बड़ी चिंता बन चुका है। यह बयान किसी रणनीति का नहीं, बल्कि सियासी डर का संकेत देता है।

2021 से लक्ष्मी भंडार योजना चला रही ममता सरकार

ममता सरकार 2021 से लक्ष्मी भंडार योजना चला रही है। इसके तहत एससी-एसटी वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1200 और अन्य महिलाओं को 1000 रुपये बैंक खातों में दिए जाते हैं। महिलाओं के लिए दी जाने वाली योजना अब नियमित आय का भरोसा बन चुकी है। इसका असर मध्य प्रदेश की लाडली बहना, झारखंड की मइया सम्मान और छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना की तरह सीधा और स्थायी दिख रहा है। साथ ही बंगाल की सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना में मातृ शक्ति और महिला नेतृत्व की गहरी स्वीकार्यता रही है। यहां बीजेपी को हमेशा अतिरिक्त संघर्ष करना पड़ा है।

पिछले विधानसभा चुनाव में BJP को मिली थीं 77 सीटें

2021 के विधानसभा चुनाव में इस ट्रेंड के संकेत साफ मिले थे। उस चुनाव में टीएमसी ने 213 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी। बीजेपी 77 सीटों पर सिमटी। ममता ने चुनाव को बंगाल की बेटी बनाम बाहरी राजनीति के फ्रेम में रखा। इसमें महिला वोट निर्णायक साबित हुआ। 2021 में बीजेपी ने सोनार बंगला संकल्प पत्र में महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 33 प्रतिशत आरक्षण, विधवाओं की पेंशन बढ़ाने, महिला पुलिस बटालियन, महिलाओं के लिए मुफ्त या सस्ती सार्वजनिक परिवहन और केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा जैसे वादे किए थे। मगर, नतीजों ने साबित कर दिया कि घोषणाएं जमीन पर चल रही योजनाओं की बराबरी नहीं कर सकीं।

लोकसभा चुनाव में BJP को मिली थीं 12 सीटें

2024 में हुए लोकसभा चुनाव में यह ट्रेंड और पुख्ता होकर सामने आया था। बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से टीएमसी ने 29 सीटें जीती थीं। बीजेपी 12 सीटों पर सिमट गई थी। राजनीतिक विश्लेषण बताता है कि ग्रामीण और अर्ध शहरी इलाकों में महिला वोट का बड़ा हिस्सा फिर ममता बनर्जी के साथ गया, जहां लक्ष्मी भंडार समेत अन्य महिला केंद्रित योजनाओं ने सीधे मतदाता व्यवहार को प्रभावित किया।

महिला वोट बना निर्णायक

इस विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए महिला वोट सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बन चुका है। बिहार में दस हजारी जैसी नकद सहायता योजनाओं ने चुनावी समीकरण बदले थे और उसी मॉडल को बंगाल में अपनाने पर पार्टी में मंथन चल रहा है। मगर, बंगाल का राजनीतिक मैदान अलग है। यहां ममता पहले से लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री, रूपश्री, सबुज सथी जैसी योजनाओं का मजबूत नेटवर्क खड़ा की हुई हैं। इसने महिला मतदाताओं के साथ सीधा और भरोसेमंद रिश्ता बनाया है।

बीजेपी ने अन्य राज्यों में ऐसी ही योजनाओं से बनाई बढ़त

बीजेपी ने दूसरे राज्यों में महिला केंद्रित योजनाओं के जरिए चुनावी बढ़त बनाई है। एमपी में लाडली बहना योजना शुरू की। छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना चला रही है। महाराष्ट्र में लाड़की बहिन योजना, असम में ओरुनोदोई योजना, यूपी में कन्या सुमंगला, गुजरात में वहली दीक्री योजना ने पार्टी को सियासी फायदा दिलाया, लेकिन बंगाल में यह फॉर्मूला लागू करना आसान नहीं दिख रहा। दरअसल, यहां महिला कल्याण का नैरेटिव पहले से ममता बनर्जी के पक्ष में है। सूत्रों के अनुसार बीजेपी इस चुनाव में महिलाओं के लिए नई नकद सहायता योजना, रोजगार और स्वरोजगार, सुरक्षा-पुलिसिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेंशन को जोड़कर संयुक्त पैकेज पेश कर सकती है।

धर्म-जाति और दलगत अपील नहीं, अपना फायदा देख रहीं महिलाएं

अब बंगाल में महिला वोट चुनाव जिताने-हराने वाली ताकत बन चुका है। जिस तरह बिहार में महिलाओं ने परंपरागत सियासी गणित को बदला था, वैसे ही बंगाल में भी महिलाएं धर्म, जाति और दलगत अपील से ऊपर उठकर अपना लाभ और भरोसे के आधार पर फैसला कर रही हैं। यही कारण है कि लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाएं बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हैं।

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