TMC Abhishek Banerjee On Supreme Court: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत कर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सभी बागी सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में लोकसभा अध्यक्ष से दलबदल विरोधी कानून के तहत सांसदों की अयोग्यता पर जल्द फैसला कराने की मांग की गई है।
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और लोकसभा महासचिव को भी नोटिस जारी करने की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि लोकसभा सचिवालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पहले से ही कोर्ट में उपस्थित हैं, इसलिए अलग से नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में इसी तरह का एक और मामला पहले से लंबित है। शिवसेना (UBT) ने अपने छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस याचिका पर जस्टिस पी.ए. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ सुनवाई कर रही है।
अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दायर अयोग्यता याचिकाओं पर अनावश्यक देरी हो रही है।
उन्होंने अदालत से संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत 20 सांसदों के खिलाफ लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा कराने का निर्देश देने की मांग की।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले को लेकर अभिषेक बनर्जी ने पिछले महीने 27 जुलाई को लिखित रूप से याद दिलाने के बाद 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भेट भी की थी। बता दें कि यह पूरा मामला तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल में हुई बगावत के बाद सामने आया है।
TMC के 20 लोकसभा सांसदों ने घोषणा की थी कि वे त्रिपुरा स्थित राजनीतिक संगठन नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए हैं। साथ ही 20 बागी सांसदों ने लोकसभा में अलग पार्टी के रूप में मान्यता देने का आग्रह किया था।
अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दायर अयोग्यता याचिकाओं पर अनावश्यक देरी हो रही है। उन्होंने अदालत से संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत 20 सांसदों के खिलाफ लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा कराने का निर्देश देने की मांग की।
हालांकि कोर्ट ने लोकसभा अध्यक्ष और महासचिव को अलग से नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उनकी ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पहले से अदालत में मौजूद थे।
दरअसल यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 लोकसभा सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने या पार्टी के विलय का दावा किया। TMC का कहना है कि ये सभी सांसद उसके चुनाव चिन्ह पर जीतकर लोकसभा पहुंचे थे,
इसलिए किसी दूसरे राजनीतिक दल से जुड़ना स्वैच्छिक रूप से पार्टी की सदस्यता छोड़ने के समान है। पार्टी ने दलबदल विरोधी कानून के तहत इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने के बाद सभी बागी सांसदों को अदालत में अपना पक्ष और जवाब दाखिल करना होगा।
काकोली घोष दस्तीदार
शताब्दी रॉय
बापी हलदर
सायोनी घोष
खलीलुर्रहमान
अबू ताहिर खान
यूसुफ पठान
मिताली बैग
डॉ शर्मिला सरकार
प्रसून बंद्योपाध्याय
जगदीश बर्मा बसुनिया
असित कुमार मल
अरूप चक्रवर्ती
रचना बनर्जी
माला रॉय
कालीपद सोरेन
दीपक अधिकारी
जून मालिया
पार्थ भौमिक