Yusuf Pathan BJP: पश्चिम बंगाल में अब तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता भारतीय जनता पार्टी का ही खेल बिगाड़ते हुए नजर आ रहे है। ऐसे समय में जब शिवसेना के चुनाव चिन्ह और पार्टी पर अधिकार के मुददे पर अदालत में मामला चल रहा है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी, तृणमूल कांग्रेस, से अलग हुए सांसदों का समूह भाजपा का खेल बिगाड़ता दिख रहा है।
इन सांसदों के टीएमसी से अलग होने को लेकर फिलहाल तक भाजपा का यह पक्ष रहा है कि यह पूर्णता उनका अपना निर्णय रहा है। वे किसी भी हालत में भाजपा में नहीं आने वाले हैं। लेकिन इन सांसदों को लेकर इनके ही समूह के एक सांसद ने दावा किया है कि सभी सांसद भाजपा में जाएंगे। जिससे भाजपा के स्थापित पक्ष को झटका लगा है। इससे यह भी शंका उत्पन्न होने की संभावना उत्पन्न हो गई है कि टीएमसी के फूटने के पीछे क्या भाजपा ही थी।
महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के फूटने के पीछे भी भाजपा पर आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में टीएमसी सांसदों के गुट से यह दावा आना कि वे भाजपा में जाएंगे। यह बयान आने वाले दिनों में भाजपा की राजनीतिक चिंता को बढ़ा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक टीएमसी के जिन 20 सांसदों ने अपने दल से अलग होकर NCPI का दामन थामा था। उसमें से 17 सांसदों के आने वाले दिनों में भाजपा में जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। जबकि पूर्व क्रिकेटर युसूफ पठान सहित अल्पसंख्यक समाज से आने वाले टीएमसी के तीन सांसदों के भाजपा में जाने को लेकर कहा जा रहा है कि उनके संसदीय क्षेत्र की राजनीतिक सरंचना और मतदाताओं के समीकरण को देखते हुए वे भाजपा में नहीं जाएंगे।
TMC से बगावत करके NCPI में शामिल होने वाले सांसदों में तीन मुस्लिम सांसद भी हैं। यूसुफ पठान (बहरामपुर से सांसद), अबू ताहिर खान (मुर्शिदाबाद से सांसद) और खलीलुुर रहमान (जंगीपुर से सांसद)। अबू ताहिर खान ने साफ कह दिया है कि हम न तो BJP में शामिल होंगे और न ही NDA का हिस्सा बनेंगे।" उन्होंने खलीलुुर रहमान और यूसुफ पठान के बारे में भी यही बात कही और कहा कि वे तीनों NDA को बाहर से समर्थन देंगे।
हालांकि इधर, लोकसभा सचिवालय ने फिलहाल अधिकारिक रूप से उनके NCPI में जाने को लेकर भी कोई बयान नहीं दिया है। यह कहा जाता है कि जब किसी दल में बगावत होती है। उस समय यह नियम है कि पार्टी तो किसी अन्य दल के साथ बहुमत के आधार पर विलय कर सकता है।
लेकिन उसके सांसद विलय नहीं कर सकते हैं। लोकसभा सचिवालय को भी फिलहाल तक इस कानून का शायद कोई तोड़ नहीं मिला है। यह कहा जा रहा है कि इसी वजह से उसने टीएमसी से अलग हुए सांसदों के NCPI में विलय को लेकर अधिकारिक बयान नहीं दिया है।
वे कानूनी रूप से इस समय भी तृणमूल कांग्रेस के ही सांसद है। यह बताया जा रहा है कि ऐसे में जब ये सांसद NCPI में नहीं जा पाए हैं तो वे भाजपा में भी नहीं जा सकते हैं। लेकिन अपनी विकट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही उन्होंने अपने एक साथी से भाजपा में जाने को लेकर बयान दिलाया है।
जिससे भाजपा पर दबाव बने और वह कोई रास्ता निकाले। ऐसा नहीं होने पर यह संभव है कि अगले संसद सत्र में उनको टीएमसी के साथ ही बैठना पड़े। जो इन बागी सांसदों के लिए चुनौती से अधिक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन सकता है।