अभिषेक बनर्जी पर हमले से भड़कीं ममता (डिजाइन फोटो) 
पश्चिम बंगाल

शासक हत्यारे बन गए...अभिषेक बनर्जी पर हमले से भड़कीं ममता, कहा- उन्हें शर्म आनी चाहिए

West Bengal में सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले पर राजनीति शुरू हो गई है। ममता बनर्जी से लेकर अखिलेश यादव तक ने बीजेपी पर वार किया है तो बीजेपी ने पलटवार किया है।

अर्पित शुक्ला

Mamata Banerjee on Abhishek Attack: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के नंबर दो नेता अभिषेक बनर्जी के साथ सोनारपुर में मारपीट की घटना सामने आई है। हालात ऐसे बन गए कि टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को हेलमेट पहनकर वहां से निकलना पड़ा। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। ममता बनर्जी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इस पर शर्म आनी चाहिए।

टीएमसी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीजेपी समर्थित उपद्रवियों के हिंसक हमले के बावजूद हमारे राष्ट्रीय महासचिव पीछे नहीं हटे। इसके बजाय वे पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहे। ममता बनर्जी ने इसी पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए अपना बयान जारी किया।

TMC नेता ने बीजेपी पर बोला हमला

टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने एक्स पर लिखा, "बंगाल में आखिर क्या हो रहा है? देश की दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा नेता चुनाव बाद हुई हिंसा में मारे गए एक व्यक्ति के परिवार से मिलने गए थे। अभिषेक बनर्जी पर कुछ भाजपा समर्थकों ने हमला कर दिया। उनकी जान को खतरा है। पुलिस कहां है? मतगणना के दिन सुरक्षा क्यों हटाई गई? गृह मंत्री को इसका जवाब देना चाहिए।"

अखिलेश यादव का बयान

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लिखा, "बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी जी पर जानलेवा हमला करवाकर भाजपा सरकार ने यह साबित कर दिया है कि वह नफरत और हिंसा की राजनीति से बाहर नहीं निकल सकती। इतने संवेदनशील माहौल में भी पर्याप्त पुलिस व्यवस्था का न होना किसी बड़ी साजिश की ओर संकेत करता है। यह बेहद निंदनीय है।"

बीजेपी का जवाब

वहीं, अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा, "अंडे फेंकने और मारपीट की घटना में भाजपा की कोई भूमिका नहीं है। लोग जानते हैं कि टीएमसी ने पिछले 15 वर्षों में राज्य को किस तरह चलाया है। पुलिस और प्रशासन को चुनाव बाद हिंसा से प्रभावित परिवारों की चिंता करनी चाहिए। टीएमसी को इस मुद्दे पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक या राजनीतिक अधिकार नहीं है। किसी भी सभ्य समाज में ऐसी घटनाएं स्वीकार्य नहीं हो सकतीं। इस चुनाव के नतीजों ने दिखा दिया है कि अहंकार और एकदलीय प्रभुत्व लंबे समय तक नहीं टिकता। लोगों में नाराजगी या शिकायतें हो सकती हैं, लेकिन ऐसी घटनाओं को अंजाम देना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। हमारी पार्टी का इन घटनाओं से किसी भी प्रकार का संबंध नहीं हैं"।

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