बारिश से बचने के लिए पंडाल में घुसे श्रद्धालु, बढ़ा भीड़ का दबाव।
हादसे के बाद घायलों को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया।
चोरबागान की घटना के बाद दुर्गा पूजा पंडालों में भीड़ प्रबंधन पर उठे सवाल।
Kolkata Durga Puja Stampede: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में बड़ा हादसा हो गया। बारिश से बचने के लिए पंडाल में लोगों की भीड़ बढ़ने के बाद भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस दौरान पंडाल का एक हिस्सा ढह गया। हादसे में 17 लोगों की मौत और करीब 40 लोगों के घायल होने की खबर है। हालांकि, मृतकों और घायलों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
घटना के बाद घायलों को इलाज के लिए कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। संकरी गलियों और भारी भीड़ के कारण राहत एवं बचाव कार्य में भी मुश्किलें आने की जानकारी सामने आई है।
चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में पिछले तीन-चार दिनों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे थे। पंडाल की लोकप्रियता के कारण यहां लगातार भीड़ जुट रही थी। शनिवार रात भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इसी दौरान बारिश शुरू हो गई, जिससे बाहर खड़े श्रद्धालु भीगने से बचने के लिए पंडाल के अंदर जाने लगे।
पंडाल में पहले से ही काफी भीड़ थी। ऐसे में लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई और भीड़ का दबाव बढ़ने लगा। इसी बीच पंडाल का एक हिस्सा ढह गया और वहां अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, पंडाल का ढांचा किस वजह से गिरा, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हादसे के कारणों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
चोरबागान उत्तर कोलकाता का घनी आबादी वाला इलाका है। यहां की सड़कें और गलियां संकरी हैं। दुर्गा पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से पहले ही आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो जाती है। बारिश के कारण पंडाल में भीड़ बढ़ने से हालात और बिगड़ गए।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लोगों के आने-जाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची थी। हादसे के बाद घायलों को बाहर निकालने और अस्पताल पहुंचाने में भी परेशानी हुई। हालांकि, भीड़ के दबाव और पंडाल का हिस्सा ढहने के बीच संबंध की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
हादसे के बाद घायलों को इलाज के लिए कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। पंडाल से अस्पताल की दूरी करीब दो से तीन किलोमीटर बताई गई है। इलाके में भारी भीड़ और संकरी सड़कों के कारण राहत कार्य प्रभावित होने की खबर है।
प्रारंभिक जानकारी में करीब 40 लोगों के घायल होने की बात कही गई है। वहीं, कुछ रिपोर्टों में 17 लोगों की मौत का दावा किया गया है। मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर आधिकारिक पुष्टि सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से घटना से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18003455678 जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
घटना के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के कलकत्ता मेडिकल कॉलेज पहुंचने की जानकारी दी गई है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हादसे पर दुख जताया और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
चोरबागान की घटना के बाद दुर्गा पूजा पंडालों में भीड़ को नियंत्रित करने और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। जब पिछले तीन-चार दिनों से पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे, तो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? बारिश के दौरान लोगों को सुरक्षित रखने और पंडाल से बाहर निकालने की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी? ये सवाल भी हादसे के बाद चर्चा में हैं।
फिलहाल, हादसे की सटीक वजह और मृतकों की संख्या को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। इस बीच घायलों का इलाज जारी है। चोरबागान की घटना ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षित निकासी और आपातकालीन व्यवस्था की तैयारियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।