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गुस्से में गाली दी तो हो सकती है जेल, जानें क्या कहता है कानून... पढ़ें पूरा नियम

गुस्से में किसी को गाली देना सिर्फ गलत व्यवहार नहीं, बल्कि कानूनी अपराध भी है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

हितेश तिवारी

Verbal Abuse Crime : अक्सर ऐसा होता है कि लोग गुस्से में अपना आपा खो देते हैं और सामने वाले को गाली दे देते हैं। कई बार बात वहीं खत्म हो जाती है, लेकिन कभी-कभी दूसरे व्यक्ति को यह बुरा लग जाता है और विवाद बढ़ जाता है। छोटी सी बहस धीरे-धीरे बड़ी लड़ाई में बदल जाती है और फिर मामला पुलिस तक पहुंच जाता है।

बहुत से लोग यह नहीं जानते कि गाली देना सिर्फ बुरी आदत नहीं है, बल्कि भारत में यह कानून के हिसाब से भी गलत माना जाता है। खासकर तब, जब गाली किसी सार्वजनिक जगह पर दी जाए या किसी की इज्जत को नुकसान पहुंचाने के इरादे से बोली जाए। ऐसी स्थिति में सामने वाला व्यक्ति अपनी शिकायत पुलिस को दे सकता है और आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो सकती है।

गाली देने पर हो सकती है जेल

भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 356 के मुताबिक सार्वजनिक जगह पर अश्लील या गंदी भाषा बोलना एक अपराध है। इस धारा के तहत अगर कोई व्यक्ति खुले में किसी को अपशब्द कहता है, तो उसके खिलाफ केस दर्ज किया जा सकता है। इस अपराध में दोषी पाए जाने पर तीन महीने तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

अगर गाली में किसी जाति के खिलाफ अपमानजनक शब्द शामिल हों, तो मामला और ज्यादा गंभीर हो जाता है। ऐसे मामलों में SC/ST एक्ट लागू होता है, जिसके तहत बहुत सख्त कार्रवाई की जाती है। इस एक्ट में गिरफ्तारी, लंबी सजा और भारी जुर्माने जैसी कठोर धाराएँ शामिल हैं। इसलिए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में गंभीर अपराध माना जाता है।

गाली देना सिर्फ गलत नहीं, कानूनी अपराध भी

बीएनएस की धारा 351 भी गाली-गलौज से जुड़े मामलों में लागू हो सकती है। यह तब लागू होती है, जब गाली जानबूझकर इस तरह दी जाए कि सामने वाला उकस जाए और शांति भंग हो जाए। ऐसे मामलों में अधिकतम दो साल की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यानी सिर्फ गुस्से में कही बात भी आपको बड़ी परेशानी में डाल सकती है।

यदि गाली किसी महिला की मर्यादा को ठेस पहुंचाने के लिए दी गई हो तो मामला और भी संवेदनशील हो जाता है। इस स्थिति में BNS की धारा 357 लागू होती है। इसमें एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। महिलाओं के सम्मान से जुड़ी बातों में पुलिस और अदालतें और ज्यादा सख्ती से पेश आती हैं।

गुस्से में अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना जरूरी

यह जानना जरूरी है कि गुस्से में भी अपनी भाषा पर नियंत्रण रखा जाए। एक पल की गलती, एक गलत शब्द, और जिंदगी में बड़ी कानूनी मुसीबत खड़ी हो सकती है। समझदारी इसी में है कि तनाव में भी शांत रहें और सोच-समझकर ही बोलें।

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