Foreign Manager Video : एक भारतीय कर्मचारी का अनुभव सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने वर्क-लाइफ बैलेंस और मैनेजरों की संवेदनशीलता को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में सौरभ वर्मा नाम के शख्स ने बताया कि उनके बच्चे का प्रीस्कूल में पहला दिन था।
इसी वजह से वह एक ऑफिस मीटिंग में कुछ देर से शामिल हुए। जब उन्होंने अपने विदेशी मैनेजर को देरी का कारण बताया, तो मैनेजर ने उनसे ऐसा सवाल पूछा जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी। मैनेजर ने आश्चर्य जताते हुए पूछा कि वह मीटिंग में शामिल ही क्यों हुए हैं, जबकि यह उनके बच्चे के जीवन का इतना महत्वपूर्ण दिन है।
सौरभ के मुताबिक, उनके मैनेजर ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें उस दिन काम नहीं करना चाहिए और अपने बच्चे के साथ समय बिताना चाहिए। मैनेजर ने कहा कि प्रीस्कूल का पहला दिन किसी भी बच्चे के लिए भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए माता-पिता का साथ उसके लिए बेहद जरूरी है।
सौरभ ने बताया कि मैनेजर ने उन्हें मीटिंग छोड़ने और छुट्टी लेने के लिए लगभग मजबूर कर दिया। इस अनुभव से प्रभावित होकर उन्होंने वीडियो में कहा कि क्या कोई भारतीय मैनेजर भी ऐसी स्थिति में कर्मचारी को काम छोड़कर परिवार को प्राथमिकता देने की सलाह देगा? उन्होंने माना कि कई भारतीय कार्यस्थलों में ऐसे मामलों को अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
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वीडियो वायरल होने के बाद हजारों लोगों ने अपनी राय दी। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया कि विदेशी मैनेजर अक्सर कर्मचारियों के निजी जीवन और पारिवारिक जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझते हैं। कुछ लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें परिवार की गंभीर परिस्थितियों में भी लगातार काम करने का दबाव झेलना पड़ा।
एक यूजर ने लिखा कि उसका बच्चा अस्पताल में भर्ती था, फिर भी मैनेजर बार-बार ऑफिस जॉइन करने के लिए फोन कर रहे थे। वहीं कई लोगों ने कहा कि भारतीय कॉरपोरेट संस्कृति में कर्मचारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत है। इस वीडियो ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कार्यस्थल पर उत्पादकता के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी उतनी ही अहमियत मिलनी चाहिए।