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हायर और फायर नीति से दलित-पिछड़ा वर्ग होगा तबाह? संसद में चंद्रशेखर रावण ने श्रम सुधारों को बताया 'खतरनाक'

Chandrashekhar Azad Ravan: छंटनी और तालाबंदी के लिए पूर्व अनुमति की सीमा को 100 कर्मचारियों से बढ़ाकर 300 करने के प्रावधान का कड़ा विरोध किया। इस दौरान उन्होंने विधेयक को लेकर कई सवाल उठाए हैं।

मनोज आर्या

Chandrashekhar Azad Ravan In Parliament: छंटनी और तालाबंदी के लिए पूर्व अनुमति की सीमा को 100 कर्मचारियों से बढ़ाकर 300 करने के प्रावधान का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि देश की 70 प्रतिशत से अधिक औद्योगिक इकाइयां इस दायरे में आती हैं, जिससे श्रमिकों की नौकरी की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। आजाद ने चिंता जताई कि 'हायर और फायर' की इस नीति का सबसे बुरा असर एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के श्रमिकों पर पड़ेगा, जो औद्योगिक और असंगठित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कार्यरत हैं। उन्होंने नगीना के पारंपरिक लकड़ी नक्काशी उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे कानूनों से न केवल आर्थिक बल्कि सांस्कृतिक क्षति भी होगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सुधारों के नाम पर श्रमिकों के विरोध करने का अधिकार न छीना जाए और उनके सामाजिक सुरक्षा लाभ सुनिश्चित किए जाएं।

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