मुसलमानों के खिलाफ बयान पर नई रिपोर्ट आई। इमेज-एआई 
उत्तराखण्ड

इस राज्य में मुसलमानों के लिए तेजी से फैल रही नफरत, इस चौंकाने वाली रिपोर्ट में और क्या कहा गया?

Hate Speech Report: एपीसीआर की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में उत्तराखंड में मुसलमानों के खिलाफ नफरत, हिंसा और आर्थिक बहिष्कार में चिंताजनक बढ़ोतरी का खुलासा किया गया है। इसे संविधान के लिए खतरा बताया है।

रंजन कुमार

Communal Tension Report: एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) ने एक रिपोर्ट पेश की है, जो चौंकाने वाली है। एपीसीआर ने उत्तराखंड में मुस्लिम विरोधी नफरत, हिंसा के लिए उकसाने, आर्थिक बहिष्कार तथा व्यवस्थित उत्पीड़न पर विस्तृत फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट जारी की है। इसमें राज्य की स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। यह कहा है कि उत्तराखंड में डर, असुरक्षा एवं असहिष्णुता का माहौल गहरा रहा है। इससे सांप्रदायिक तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए एपीसीआर की एक टीम ने विभिन्न जिलों का दौरा कर पीड़ितों से मुलाकात की। जमीनी हकीकत के आधार पर सबूत इकट्ठा किए।

रिपोर्ट के अनुसार मुसलमानों को धमकियां देने, उनकी नौकरियों और व्यवसायों का बहिष्कार करने एवं आर्थिक दबाव डालने की घटनाएं बढ़ी हैं। इसे संविधान के मूल्यों और देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। रिपोर्ट में खासकर दिसंबर 2021 में हरिद्वार में आयोजित तथाकथित धर्म संसद का जिक्र किया गया है, जिसे इस चरमपंथी प्रवृत्ति का स्पष्ट उदाहरण बताया गया है।

खुलेआम दिए नफरती भाषण

एपीसीआर के अनुसार इस कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने मुसलमानों के खिलाफ खुलेआम नफरत भरे भाषण दिए। हिंसा भड़काने वाले बयान दिए और यहां तक ​​कि मुसलमानों की हत्या करने और हिंदू राष्ट्र स्थापित करने का आह्वान किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे भाषण न केवल संविधान का उल्लंघन करते हैं, बल्कि समाज में नफरत के बीज बोते हैं।

प्रशांत भूषण ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील प्रशांत भूषण ने एपीसीआर की रिपोर्ट जारी कर कहा कि ये तथ्य भारतीय संविधान का स्पष्ट उल्लंघन दिखाते हैं। नफरत भरे भाषण और हिंसा फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने में विफलता कानून के शासन को कमजोर करती है। भूषण ने कहा कि इस संकट का एकमात्र समाधान न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों को सख्ती से लागू करना है।

लोग चिंतित

एपीसीआर ने मांग की है कि नफरत भरे भाषण और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ तत्काल, निष्पक्ष एवं प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाए। यह पीड़ित समुदाय को पूरी सुरक्षा देने और आर्थिक बहिष्कार जैसे कृत्यों को तुरंत रोकने का भी आह्वान करता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सभी नागरिकों के मौलिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता तथा संवैधानिक मूल्यों की रक्षा होनी चाहिए। इस मुद्दे पर पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमर हर्ष मंदर, उत्तराखंड के पूर्व राज्य मंत्री याकूब सिद्दीकी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता व्यक्त की।

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