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उत्तर प्रदेश

रात में योगी से 35 मिनट बात...सुबह दोनों डिप्टी CM से मुलाकात, क्या है संघ प्रमुख की 'सीक्रेट' मीटिंग्स का सच?

Mohan Bhagwat Meetings: यूपी की पॉलिटिक्स में इन दिनों पर्दे के पीछे बहुत कुछ चल रहा है। ऐसा लग रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने UP में राजनैतिक समीकरणों को साधने का बीड़ा स्वंय उठा लिया है।

अभिषेक सिंह

UP Politics: उत्तर प्रदेश की पॉलिटिक्स में इन दिनों पर्दे के पीछे बहुत कुछ चल रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उत्तर प्रदेश में राजनैतिक समीकरणों को साधने का बीड़ा स्वंय उठा लिया है। बुधवार रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरएसएस चीफ मोहन भागवत के साथ 35 मिनट तक चर्चा की।

गुरुवार सुबह दोनों डिप्टी चीफ मिनिस्टर केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी आरएसएस चीफ से 15-15 मिनट की मुलाकात की। सीएम योगी आदित्यनाथ की दोनों डिप्टी सीएम से मुलाकात के बाद इस मीटिंग को काफी अहमियत दी जा रही है। इन मुलाकातों ने उत्तर प्रदेश के पॉलिटिकल गलियारों में चर्चाओं की एक नई लहर पैदा कर दी है।

क्यों अहम हैं संघ प्रमुख की मुलाकातें?

सूत्रों से पता चलता है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने तीनों नेताओं से यूजीसी बिल, शंकराचार्य मुक्तेश्वर आनंद विवाद और मणिकर्णिका घाट गिराए जाने के मुद्दे पर फीडबैक मांगा, जो कुछ समय से खबरों में हैं। चर्चा 2027 के चुनावों से पहले आरएसएस संगठन और सरकार की तैयारियों पर भी फोकस रही। आने वाले दिनों में यूपी बीजेपी और सरकार में बदलाव को लेकर भी चर्चा के संकेत हैं।

2027 में न होने पाए 2024 वाला हाल!

माना जा रहा है कि संभावित कैबिनेट विस्तार और प्रदेश अध्यक्ष की लीडरशिप में नई ऑर्गेनाइजेशनल टीम को लेकर भी बातचीत हुई। सूत्रों का कहना है कि आरएसएस से लेकर बीजेपी तक टॉप लीडरशिप 2024 के लोकसभा चुनाव की गलतियों को 2027 के विधानसभा चुनाव में दोहराना नहीं चाहती।

संघ संभालेगा 2027 चुनाव की कमान!

इसीलिए संघ इस बार जमीन पर पूरी तरह सक्रिय रहेगा। 2024 के आम चुनाव के बाद जिस तरह से संघ ने महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार में अपनी ताकत दिखाई है उसे देखते हुए अब वह 2027 में अपनी भूमिका तय कर सकता है। हालांकि, मोहन भागवत ने साफ कर दिया है कि वह बीजेपी को रिमोट से कंट्रोल नहीं करते, बल्कि हिंदू-समर्थक एजेंडा चलाने वाली सभी पार्टियां उनके लिए बराबर हैं।

बड़े संदेश वाला है डिप्टी CM का कदम

आरएसएस चीफ से मीटिंग से ठीक पहले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का 101 बटुकों को सम्मानित करना एक बड़े सियासी संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। कुछ लोग इसे सीएम योगी आदित्यनाथ से टकराव के तौर पर देख रहे हैं, लेकिन इसका मकसद और बड़ा माना जा रहा है।

अखिलेश यादव लगातार योगी सरकार पर 'ब्राह्मण विरोधी' होने का आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में ब्रजेश पाठक का बटुकों के सम्मान में आगे आना और केशव मौर्य का शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा होना, विपक्ष के हाथों से ब्राह्मण कार्ड छीनने की बीजेपी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

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