Highlights:
सरदार पटेल जयंती पर अखिलेश यादव की रोहनिया में जनसभा
पटेल वोट बैंक को साधने की तैयारी
वाराणसी की आठ विधानसभा सीटों पर सपा की नजर
Varanasi Akhilesh Yadav's Public Meeting: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर वाराणसी पहुंचेंगे। प्रस्तावित दौरे के दौरान रोहनिया विधानसभा क्षेत्र में जनसभा के जरिए चुनावी अभियान को धार देने की तैयारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी से चुनावी शंखनाद की यह रणनीति राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जा रही है।
समाजवादी पार्टी की नजर इस आयोजन के जरिए पूर्वांचल में पटेल यानी कुर्मी समाज को अपने पक्ष में लामबंद करने पर है। रोहनिया विधानसभा क्षेत्र को पटेल बहुल सीट माना जाता है। यहां पूर्व मंत्री और सपा के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र सिंह पटेल की राजनीतिक पकड़ भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। सपा इस आयोजन के माध्यम से अपने पारंपरिक मतदाताओं के साथ दूसरे प्रभावशाली सामाजिक वर्गों को जोड़ने की कोशिश में जुटी है।
राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक, समाजवादी पार्टी अपने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के साथ पटेल समाज को भी मजबूती से जोड़ना चाहती है। पार्टी की रणनीति केवल रोहनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि वाराणसी की पिंडरा, सेवापुरी, रोहनिया और कैंट समेत विभिन्न विधानसभा सीटों पर राजनीतिक आधार मजबूत करने की है।
प्रस्तावित जनसभा में कुर्मी समाज के नेताओं, सांसदों और विधायकों को एक मंच पर लाने की तैयारी की चर्चा है। पार्टी का मानना है कि पटेल समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाकर पूर्वांचल की कई सीटों पर चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया जा सकता है।
सरदार पटेल की जयंती पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक संदेश देने का मंच भी बन सकता है। भाजपा जहां सरदार पटेल की विरासत को अपनी राजनीति से जोड़ती रही है, वहीं सपा इस अवसर पर पटेल समाज के सम्मान और भागीदारी का मुद्दा उठाने की तैयारी में है।
पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार पटेल समाज के सम्मान के मुद्दे पर अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी है। उनका दावा है कि समाज के एक वर्ग में नाराजगी है, जिसे समाजवादी पार्टी अपने पक्ष में करने का प्रयास करेगी। ये आरोप सपा नेता के राजनीतिक दावे हैं।
वाराणसी की आठ विधानसभा सीटों पर राजनीतिक पकड़ मजबूत करना समाजवादी पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल बताया जा रहा है। खास तौर पर पिंडरा, सेवापुरी, रोहनिया और कैंट जैसी सीटों पर जातीय समीकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
31 अक्टूबर को प्रस्तावित अखिलेश यादव का दौरा इसी चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरदार पटेल की जयंती पर होने वाली जनसभा में कितनी राजनीतिक ताकत जुटती है और इसका पूर्वांचल की चुनावी राजनीति पर कितना असर पड़ता है।