UP Ambedkar Statue Development Scheme: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सामाजिक समरसता और महान राष्ट्रीय विभूतियों के सम्मान से जुड़े सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण और विकास को लेकर बड़ी पहल की है । इसके अंतर्गत प्रदेश मे सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित आंबेडकर और अन्य महान विभूतियों की प्रतिमाओं को सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानजनक स्वरूप प्रदान किया जाएगा ।इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्थलों पर लगी जो मूर्तियाँ बिना छत , बिना बॉउन्ड्री के खराब हो रही हैं उन्हे सुरक्षित , सम्मानजनक और सुंदर बनाना है ताकि नई पीढ़ी मे सम्मान की भावना बढ़े | सरकार की तरफ से इसे लेकर बजट भी जारी कर दिया गया है ।
प्रदेश के कई ग्रामीण और शहरी इलाकों में बाबा साहेब आंबेडकर सहित सामाजिक न्याय एवं समरसता के प्रणेताओं की प्रतिमाएं एवं स्मारक स्थल खुले स्थानों पर होने की वजह से समय के साथ पुरानी या क्षतिग्रस्त हो गई है। कभी-कभी असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़फोड़ या क्षति पहुंचाने की घटनाएं सामने आती थीं। इससे स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और तनाव की स्थिति पैदा होने की संभावना बन जाती है।
इसे लेकर प्रदेश सरकार ने महापुरुषों के इन प्रतिमा स्थलों का विकास एवं सौंदर्यीकरण का संकल्प लिया है। इसके लिए सरकार डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना लेकर आई है जिसके प्रथम चरण मे प्रदेश की सभी 403 विधानसभा मे स्थापित प्रतिमा स्थलों का विकास और सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। प्रयागराज के जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर पटेल बताते हैं कि जनपद मे इसके लिए 12 करोड़ का बजट आवंटित कर दिया गया है। प्रत्येक विधानसभा से महापुरुषों के दस स्मारकों का चयन कर उनका कायाकल्प किया जा रहा है।
इसके अंतर्गत योजना के प्रथम चरण में प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 4,030 प्रतिमा स्थलों को विकसित किया जाएगा। इसके लिए योगी सरकार ने 403 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित कर दी है। इससे प्रत्येक प्रतिमा स्थल के विकास के लिए औसतन 10 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध होगी। हालांकि शासनादेश में स्थल विकास की अधिकतम लागत 40 लाख रुपये प्रति मूर्ति स्थल निर्धारित की गई है और वास्तविक कार्य का आकलन स्थल की आवश्यकता के अनुसार किया जाएगा।
जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर पटेल का कहना है कि इसके लिए कार्यदायी संस्थाएं भी चिन्हित कर ली गई है । जिले की सभी 12 विधानसभा क्षेत्र से इसके लिए जन प्रतिनिधियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं लेकिन अभी लक्ष्य के मुताबिक विधायकों से प्रस्ताव नहीं प्राप्त हुए हैं ।
इस योजना में केवल डॉ. आंबेडकर ही नहीं, बल्कि संत रविदास, संत कबीर, महात्मा ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसे सामाजिक न्याय और समरसता के प्रणेताओं की प्रतिमाओं के विकास को भी शामिल किया गया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र मे इन महापुरुषों की अनेक प्रतिमाएं छत और बाउंड्री वॉल जैसी आवश्यक सुविधाओं से रहित हैं, जिसके कारण वे मौसम, अतिक्रमण और उपेक्षा के प्रति संवेदनशील रहती हैं। ऐसे प्रतिमा स्थलों का संरक्षण करते हुए आसपास के क्षेत्र का भी सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
योजना के तहत प्रतिमा स्थलों पर रेलिंगयुक्त स्टील की सीढ़ी, प्रतिमा की छत, बाउंड्री, फिनिशिंग, हरियाली और प्रकाश व्यवस्था जैसे कार्य कराए जाएंगे। इसके साथ ही स्वच्छ, व्यवस्थित और सम्मानजनक वातावरण तैयार किया जाएगा। प्रतिमा के नाम और उसके इतिहास को संक्षिप्त रूप में प्रदर्शित करने वाला 3×2.5 फीट आकार का सूचना बोर्ड भी लगाया जाएगा। इसमे यह भी प्रावधान किया गया है कि सार्वजनिक स्थल पर स्थापित पुरानी अथवा क्षतिग्रस्त प्रतिमा के स्थान पर संगमरमर की नई प्रतिमा स्थापित की जा सकेगी। इसके लिए सरकार ने कुछ मानक तय किये हैं जिन्हे पूरा करने के बाद ही नई प्रतिमा स्थापित होगी। शासन ने योजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए समय-सारिणी भी निर्धारित की है। दिसंबर 2026 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए समय सीमा निर्धारित की गई है।