सुप्रीम कोर्ट और यूपी पुलिस।  
उत्तर प्रदेश

योगी की पुलिस पर भड़का सुप्रीम कोर्ट...दाढ़ी खींचने और पीटने केस में लापरवाही पर लगाई फटकार

Hate Crime Case : सुप्रीम कोर्ट ने हेट क्राइम मामले में यूपी पुलिस को फटकार लगाई। इसमें शख्स की दाढ़ी नोची गई थी। अदालत ने प्रश्न पूछा कि इंडियन पीनल कोड की सही धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं।

रंजन कुमार

UP Hate Crime Case : सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में मुस्लिम व्यक्ति पर हुए हमले के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है कि जब हमला स्पष्ट रूप से धार्मिक पहचान को निशाना बनाकर किया गया था तो पुलिस ने एफआईआर में हल्की धाराएं क्यों लगाईं। कोर्ट ने कहा कि हेट क्राइम (नफरत भरा अपराध) को सामान्य अपराध की तरह नहीं देखा जा सकता।

यह विवाद साल 2021 का है, जब अहाद शेरवानी नाम के व्यक्ति पर एक हिंदू संगठन के सदस्यों ने हमला किया था। पीड़ित का आरोप है कि हमलावरों ने उसकी दाढ़ी खींची, उसे बुरी तरह पीटा और अपमानित किया। शेरवानी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि यह हमला पूरी तरह से उसकी धार्मिक पहचान की वजह से था, लेकिन यूपी पुलिस ने इसे हेट क्राइम के तौर पर दर्ज करने के बजाय एक मामूली झगड़े का रूप दे दिया।

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यम और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस को फटकार लगाई। बेंच ने पूछा कि जब मामला धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से जुड़ा था तो आईपीसी की सख्त और सही धाराएं (जैसे धारा 298) क्यों नहीं लगाई गईं? जस्टिस मेहता ने टिप्पणी की कि भले अपराध की प्रकृति तय करना ट्रायल कोर्ट का काम है, लेकिन मामले में शुरुआती स्तर पर ही गंभीर खामियां नजर आ रही हैं। कोर्ट ने कहा कि सही कानूनी प्रावधान लागू न करना जांच को कमजोर करता है और पीड़ित के साथ अन्याय है।

पुलिस की भूमिका पर सवाल

पीड़ित के वकील हुजेफा अहमदी ने दलील दी कि राज्य सरकार लगातार हेट क्राइम की धाराओं के तहत मामला दर्ज करने से बच रही है। उन्होंने प्रशासन पर इस तरह के हमलों को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया। दूसरी ओर कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार ने संबंधित जांच अधिकारी के व्यवहार को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई का सुझाव दिया है।

न्याय की प्रक्रिया और भविष्य

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस से इस पूरे मामले पर विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने साफ किया कि शुरुआती स्टेज पर सख्त और सही कानूनी प्रावधान लागू नहीं किए जाते तो इससे न्याय की पूरी प्रक्रिया दूषित होती है। अदालत ने निष्पक्ष जांच की मांग स्वीकार करते हुए उन पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का भी संकेत दिया है, जिन्होंने शिकायत को हल्का करने की कोशिश की।

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