Railway Safety Component Inspection: ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन और रेल हादसों की रोकथाम के लिए रेलवे बोर्ड ने सुरक्षा से जुड़े अहम कलपुर्जों की गुणवत्ता जांच व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब ट्रेनों के ब्रेक, पहियों, स्प्रिंग और कपलिंग जैसे अति-संवेदनशील सुरक्षा उपकरणों की जांच निजी एजेंसियों से नहीं कराई जाएगी। इनकी गुणवत्ता की जांच रेलवे की शीर्ष तकनीकी संस्था अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के विशेषज्ञ करेंगे। रेलवे बोर्ड के इस फैसले का उद्देश्य सुरक्षा से जुड़े कलपुर्जों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना है।
रेलवे बोर्ड ने चार जनवरी 2023 को थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन नीति लागू की थी। इसके तहत खरीद आदेश की कीमत और मात्रा के आधार पर कई उपकरणों की गुणवत्ता जांच निजी एजेंसियों से कराई जा सकती थी। व्यवस्था का उद्देश्य निरीक्षण प्रक्रिया को तेज करना और आरडीएसओ पर काम का बोझ कम करना था। हालांकि, निजी एजेंसियों को सुरक्षा से जुड़े कलपुर्जों की जांच सौंपे जाने के बाद फील्ड में कई तकनीकी खामियां और चिंताएं सामने आने लगीं।
कई मामलों में निजी जांच के बावजूद कलपुर्जे गुणवत्ता के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं पाए गए। मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों में हॉट एक्सल यानी पहियों का जाम होना, वैगनों के बीच कपलर टूटना, बोगी स्प्रिंग में खराबी और ब्रेक बाइंडिंग जैसी समस्याएं सामने आती रहीं।
उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों में पाया गया कि सुरक्षा से जुड़े कलपुर्जों की गुणवत्ता पर निजी एजेंसियों की निगरानी पर्याप्त नहीं है। इससे यात्रियों और माल ढुलाई की सुरक्षा को जोखिम पैदा हो सकता है। रेलवे ने इसी को ध्यान में रखते हुए अपनी नीति में बदलाव किया है। अब सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील उपकरणों की जांच अधिक विशेषज्ञ निगरानी में होगी।
रेलवे बोर्ड के उप निदेशक (रेलवे स्टोर्स) अजय कुमार के अनुसार, खरीद आदेश की संख्या या लागत चाहे जो हो, मालगाड़ी के एयर ब्रेक सिस्टम, पहियों की सीटीआरबी बेयरिंग, बोगी पार्ट्स और सीबीसी कपलर की जांच अनिवार्य रूप से आरडीएसओ करेगा। साथ ही रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (क्रिस) के पोर्टल में भी बदलाव के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी विशेषज्ञों की निगरानी से घटिया कलपुर्जों की आपूर्ति पर रोक लगाने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।