अली अहमद (सोर्स- सोशल मीडिया)
प्रयागराज

Prayagraj: अली की पेशी में काले कोट का ‘कवच’! अतीक-अशरफ के रिश्तेदारों समेत कई चेहरे कैमरे में कैद

Ali Ahmed Court Security: प्रयागराज में अली अहमद की कचहरी में पेशी के दौरान काले कोट में कई लोग आसपास नजर आए।अतीक अशरफ परिवार से जुड़े होने की चर्चा के बीच CCTV फुटेज से पहचान की पड़ताल की जा सकती है।

ओमप्रकाश सिंह परिहार, स्निग्धा श्रीवास्तव

Ali Ahmed Court Security During Hearing: माफिया अतीक अहमद के बेटे अली अहमद की कचहरी में पेशी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। पेशी के दौरान काले कोट में कई ऐसे लोग नजर आए, जिनके बारे में बताया जा रहा है कि वे अतीक-अशरफ के परिवार से जुड़े रहे हैं। इन लोगों की तस्वीरें सामने आने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की निगाहें भी इस पूरे घटनाक्रम पर टिक गई हैं। हालांकि, तस्वीरों में दिख रहे प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और पेशे की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

कचहरी में साये की तरह साथ चलते दिखे लोग

अली की पेशी के दौरान सामने आई तस्वीरों में कई लोग काली कोट पहने उसके आसपास दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि इनमें कुछ लोग वकील के भेष में कचहरी परिसर तक पहुंचे और अली के आसपास सुरक्षा कवच की तरह मौजूद रहे। इसी तरह अली के काफिले के दौरान भी कुछ संदिग्ध चेहरों के मौजूद होने की बात सामने आई है। पुलिस अब तस्वीरों और वीडियो फुटेज के आधार पर इनकी पहचान और कचहरी में पहुंचने के उद्देश्य की पड़ताल कर सकती है।

अतीक-अशरफ के परिवार से जुड़े लोगों के नाम चर्चा में

सामने आई जानकारी के मुताबिक, अतीक अहमद का सगा साला जकी अहमद, चचेरा साला मशरूर और सैफी, अशरफ का साला फैसल बाबा, अशरफ के साले का भांजा अल्तमश, मोनिश तथा शाहिस्ता परवीन के मामा का बेटा नाहिद समेत कई अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। इनके अलावा भी कई चेहरे तस्वीरों और वीडियो में दिखाई देने की बात कही जा रही है। इन लोगों का अली से क्या संबंध और पेशी के दौरान उनकी वास्तविक भूमिका क्या थी, यह जांच का विषय है।

कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

अली अहमद की पेशी संवेदनशील मामलों में शामिल होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यदि बिना अधिकृत अनुमति के कोई व्यक्ति वकील की पोशाक में आरोपी के बेहद करीब तक पहुंचा, तो यह सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता से जुड़ा सवाल है।

अब तस्वीरों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर यह भी देखा जा सकता है कि संबंधित लोग किस रास्ते से परिसर में दाखिल हुए और किसके संपर्क में रहे।

जांच के बाद ही साफ होगी भूमिका

फिलहाल तस्वीरों में नजर आने मात्र से किसी व्यक्ति को अपराधी या किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल बताना उचित नहीं होगा। संबंधित लोगों की पहचान, अधिवक्ता के रूप में उनकी वैधता और अली से उनके संपर्क की प्रकृति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस यदि मामले की पड़ताल करती है तो कचहरी परिसर के सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश रजिस्टर और उस दिन की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं।

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