प्रयागराज में स्थित आदि गणेश मंदिर  सोर्स- नवभारत लाइव
प्रयागराज

Adi Ganesh Temple: प्रयागराज में है सृष्टि का पहला गणेश मंदिर, ब्रह्माजी ने की थी स्थापना; टोडरमल से गहरा नाता

First Ganesha Temple On Earth: प्रयागराज में स्थित गणेश मंदिर सृष्टि के निर्माण से जुड़ा है। विघ्न से रक्षा के लिए ब्रह्मा जी इसकी स्थापना थी। गणेश उत्सव पर यहां भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं।

ओमप्रकाश सिंह परिहार, अमन मौर्या

Omkar Ganesh Temple Raja Todarmal History: गणेश चतुर्थी के साथ देशभर में भगवान गणपति की आराधना शुरू हो गई है। जगह-जगह गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं और भक्त विघ्नहर्ता की पूजा-अर्चना में जुटे हैं, लेकिन संगम नगरी प्रयागराज में एक ऐसा प्राचीन मंदिर भी है, जिसे पौराणिक मान्यता के अनुसार सृष्टि का पहला गणेश मंदिर माना जाता है।

गंगा तट पर स्थित इस मंदिर में विराजमान हैं आदि गणेश, जिन्हें विघ्नराज के स्वरूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि सृष्टि निर्माण के समय प्रजापति ब्रह्मा ने यहीं सबसे पहले गणपति का आह्वान किया था। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां भक्तों की विशेष भीड़ उमड़ रही है।

आदि स्वरूप की आराधना का प्रमुख केंद्र

तीर्थराज प्रयाग की धरती पर गंगा तट के किनारे स्थित यह मंदिर गणपति के आदि स्वरूप की आराधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मंदिर के पुजारी एवं भवन स्वामी सुधांशु अग्रवाल के मुताबिक, पौराणिक मान्यता है कि सृष्टि के निर्माण के समय प्रजापति ब्रह्मा ने सूर्यदेव की आराधना से पहले भगवान गणेश का आह्वान किया था। सृष्टि को दैत्यों की बुरी नजर और विघ्नों से बचाने के लिए उन्होंने गणपति को विघ्नराज के रूप में यहां स्थापित किया था। इसी वजह से इन्हें आदि गणेश कहा जाता है।

राजा टोडरमल के वंशज ने बताया इतिहास

भवन स्वामी एवं राजा टोडरमल की 17वीं पीढ़ी का वंशज सुधांशु अग्रवाल कहते हैं कि इस मंदिर का संबंध भगवान गणेश के साथ-साथ ओंकार की उत्पत्ति से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इसी स्थान से ओंकार का प्रथम उद्घोष हुआ था। इसी कारण यहां विराजमान गणपति को ओंकार गणेश के नाम से भी जाना जाता है। गणपति आराधना के इस प्राचीन केंद्र के प्रति श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। गणेश चतुर्थी पर दूर-दूर से भक्त यहां पहुंचकर विघ्नहर्ता के दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

राजा टोडरमल ने कराया था मंदिर का जीर्णोद्धार

इतिहास के पन्नों में भी इस मंदिर के जीर्णोद्धार का उल्लेख मिलता है। मुगलकाल में अकबर के वित्त मंत्री और प्रसिद्ध गणपति भक्त राजा टोडरमल ने गंगा किनारे स्थित इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक प्रमाण आज भी इसके प्राचीन स्वरूप की कहानी कहते हैं। यहां प्रतिदिन सुबह और शाम भगवान गणेश का आभूषणों से मनोहारी श्रृंगार किया जाता है।

खास बात यह है कि इन दिनों प्रयागराज में गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है, लेकिन गंगा की धारा आदि गणेश मंदिर में विराजमान प्रतिमा से फिलहाल दूर है। ऐसे में गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान गणेश के आदि स्वरूप के दर्शन कर रहे हैं और सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

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