Allahabad High Court Tablighi Jamaat Case: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जौनपुर के शाहगंज थाने में तब्लीगी जमात से जुड़े लोगों के खिलाफ कोरोना संक्रमण के आरोप में दर्ज आपराधिक मुकदमे को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। बता दें कि यह मामला अप्रैल 2020 में कोरोना संक्रमण के शुरुआती दौर में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। याचियों ने मुकदमे की कार्रवाई को निरस्त करने की मांग की थी।
शाहगंज थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी ने दो अप्रैल 2020 को आठ लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ आपदा प्रबंधन अधिनियम और महामारी रोग अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि याची दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में धार्मिक जलसे में शामिल होकर लौटे थे। इसके बाद वे अपने घरों में परिवार के साथ छिपकर रह रहे थे।
मामले में अदालत को बताया गया कि आरोपितों की चिकित्सकीय जांच कराई गई थी और इसके बाद उन्हें क्वारंटीन सेंटर भेजा गया। हालांकि, कोरोना संक्रमण की जांच में सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इसके बावजूद उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे की कार्रवाई जारी रही। याचियों की ओर से अधिवक्ता मंसूर अहमद ने दलील दी कि एफआईआर झूठे आरोपों के आधार पर दर्ज की गई थी।
याचिका पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष जांच रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया। इसमें आवेदकों के कोरोना संक्रमित नहीं पाए जाने की बात सामने आई। याचियों की ओर से इसी आधार पर आपराधिक कार्रवाई को रद्द करने की मांग की गई थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने उपलब्ध तथ्यों और मामले की परिस्थितियों के आधार पर लंबित याचिका को खारिज कर दिया।