Highlights:
60 दिन में देनी होगी अतिक्रमण की जानकारी
नोटिस के बाद 90 दिन में करनी होगी कार्रवाई
पुलिस को सहयोग और शिकायतकर्ता को सुनवाई का अधिकार
High Court Verdict Public Land Encroachment: प्रदेश में नजूल की जमीन पर काबिज लोगों को हटाने की सरकारी महत्वकांक्षी योजना के पक्ष में उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने अपना फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय के इस आदेश से प्रदेश सरकार की योजना को बल प्राप्त हुआ है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में ग्राम सभा की जमीनों और सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित भूमि से अवैध कब्जे हटाने के लिए प्रदेशव्यापी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही बरतने वाले ग्राम प्रधान, लेखपाल और संबंधित राजस्व अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की जाए। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने यह आदेश जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए दिया।
अदालत के निर्देश के मुताबिक, ग्राम सभा की जमीन पर अतिक्रमण की जानकारी मिलने पर ग्राम प्रधान और लेखपाल को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली, 2016 के नियम 66 के तहत संबंधित तहसीलदार या तहसीलदार (न्यायिक) को 60 दिनों के भीतर सूचना देनी होगी। इसके लिए आरसी फॉर्म-19 के माध्यम से प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया गया है।
वहीं, तहसीलदार को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत जारी कारण बताओ नोटिस के बाद 90 दिनों के भीतर अतिक्रमण संबंधी कार्यवाही पूरी करनी होगी। पर्याप्त कारण के बिना देरी होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जा सकती है। अदालत ने अतिक्रमण हटाने के साथ सार्वजनिक भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने का भी निर्देश दिया है।
अदालत ने ग्राम प्रधान को भूमि प्रबंधन समिति का अध्यक्ष और लेखपाल को उसका सचिव बताते हुए सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के प्रति उनकी जिम्मेदारी रेखांकित की। आदेश के अनुसार, अतिक्रमण की जानकारी संबंधित अधिकारी तक नहीं पहुंचाने या सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई नहीं करने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316 के तहत आपराधिक विश्वासघात से संबंधित कार्यवाही की जा सकती है। इसके साथ ही ग्राम प्रधान को पद से हटाने की प्रक्रिया पर भी विचार करने के निर्देश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में राजस्व विभाग को आवश्यक सहयोग देने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया है। साथ ही शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी देने और प्रत्येक चरण में सुनवाई का अवसर उपलब्ध कराने को कहा है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सार्वजनिक या सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बना रहता है और निर्धारित नियमों के तहत कार्रवाई शुरू करने के लिए आवश्यक सूचना नहीं दी जाती, तो संबंधित ग्राम प्रधान और लेखपाल के विरुद्ध हाईकोर्ट में दीवानी अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का रास्ता खुला रहेगा।