Highlights
प्रेमानंद महाराज को किडनी देंगे वृन्दावन के संत
स्वास्थ्य को लेकर संत समाज चिंतित
मुख्यमंत्री योगी को पत्र भेजकर रखेंगे अपनी मांगे
संतों ने सरकारी चिकित्सकों से उपचार कराने के लिए की मांग
Premanand Maharaj Kidney Donation: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य को लेकर संत समाज में चिंता का माहौल है। उनके स्वास्थ्य और उपचार को लेकर ब्रज के प्रमुख संत-महात्माओं ने बैठक कर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने का निर्णय लिया है। संतों ने मांग की है कि प्रेमानंद महाराज को आवश्यकता पड़ने पर सरकारी विशेषज्ञ चिकित्सकों की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें बेहतर चिकित्सा मिल सके।
बैठक में दिनेश फलाहारी महाराज सहित वृंदावन के करीब एक दर्जन प्रमुख संतों और साध्वियों ने प्रेमानंद महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हुए आवश्यकता पड़ने पर किडनी दान करने की इच्छा भी जताई। हालांकि, किसी भी अंगदान की प्रक्रिया चिकित्सकीय जांच, कानूनी प्रावधानों और संबंधित व्यक्ति की सहमति के अनुसार ही संभव है।
संतों ने प्रेमानंद महाराज को ब्रजभूमि की आध्यात्मिक धरोहर बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी वाणी, सत्संग और राधा नाम के प्रचार के माध्यम से देश-विदेश में लाखों लोगों को भक्ति मार्ग से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रवचनों से विशेष रूप से युवाओं में सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और आध्यात्मिक जीवन के प्रति रुचि बढ़ी है। आज सोशल मीडिया और विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए राधा नाम की गूंज दुनिया के अनेक हिस्सों तक पहुंच रही है।
संतों का कहना है कि प्रेमानंद महाराज के सत्संग में युवाओं की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी भी आध्यात्मिक शांति, भक्ति और भारतीय परंपराओं की ओर आकर्षित हो रही है। ऐसे संतों का स्वास्थ्य और संरक्षण केवल उनके अनुयायियों के लिए ही नहीं, बल्कि ब्रज की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
बैठक में महामंडलेश्वर कृष्णानंद जी महाराज, बाबा रामदास जी महाराज, साध्वी राधानंद गिरि, साध्वी डॉ. कृष्णा प्रिया सहित हनुमान टेकरी आश्रम से जुड़े संत भी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में प्रेमानंद महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की और उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। संतों ने भावुकता के साथ कहा कि यदि चिकित्सकीय दृष्टि से उपयुक्त हो और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी हों, तो वे किडनी दान जैसे बड़े त्याग के लिए भी तैयार हैं। कुछ संतों ने यहां तक कहा कि यदि महाराज को किसी विशेष व्यक्ति की किडनी चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त लगे, तो वे अपना अंगदान करने के लिए आगे आने को तैयार हैं।
संतों ने वृंदावन की धार्मिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि बांके बिहारी मंदिर के साथ प्रेमानंद महाराज की आध्यात्मिक उपस्थिति ने भी देश-विदेश के श्रद्धालुओं के बीच वृंदावन के प्रति आकर्षण बढ़ाने में भूमिका निभाई है। उनके सत्संग और राधा नाम के संदेश ने अनेक लोगों को ब्रज की ओर खींचा है। संत समाज चाहता है कि उनकी सेवा, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक योगदान को ध्यान में रखते हुए आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
बैठक में संतों ने युवाओं को नशे और भौतिक तनाव से दूर कर भक्ति, सेवा, संस्कार और सदाचार से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका कहना था कि संतों का सान्निध्य समाज को सकारात्मक दिशा देने का माध्यम है। प्रेमानंद महाराज जैसे संतों की वाणी और साधना से प्रेरित होकर नई पीढ़ी धर्म और आध्यात्मिकता के साथ जुड़ सकती है।
संत समाज ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य के संबंध में आवश्यक चिकित्सा सहयोग उपलब्ध कराने पर विचार किया जाए। संतों ने उनके शीघ्र स्वस्थ रहने और दीर्घायु होने की कामना करते हुए कहा कि ब्रजभूमि की भक्ति परंपरा और राधा नाम का संदेश निरंतर विश्वभर में प्रसारित होता रहे।