मथुरा में मिट्टी के गणेश जी  (सोर्स- नवभारत लाइव)
मथुरा

महंगाई की मार के बीच मथुरा में मिट्टी के गणेश जी की धूम, देखें मंगलमूर्ति के मनोहारी स्वरूप....

Ganesh Chaturthi Mathura: मथुरा में गणेश चतुर्थी को लेकर बाजारों और पंडालों में उत्साह है। महंगाई के बीच मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं की मांग बढ़ी है। मूर्तिकार दिन-रात प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं।

मोहन श्याम शर्मा, स्निग्धा श्रीवास्तव
भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और ब्रज की पावन धरती पर भक्ति के रंग निरंतर बदलते रहते हैं। कभी राधे-राधे की गूंज, कभी कान्हा के जयकारे और अब गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां-मथुरा की धार्मिक फिजा इन दिनों एक अलग ही आध्यात्मिक रंग में रंगती नजर आ रही है। गणेश चतुर्थी को लेकर शहर के बाजारों, गलियों, कॉलोनियों और मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में उत्साह दिखाई दे रहा है। भगवान गणेश की एक से बढ़कर एक मनोहारी प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।
मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर मिट्टी को गणपति के दिव्य स्वरूप में ढालने में जुटे हैं। किसी प्रतिमा में विघ्नहर्ता आशीर्वाद की मुद्रा में विराजमान हैं, तो कहीं बाल गणेश का मोहक रूप मन को छू रहा है। कहीं गणपति कमल पर विराजमान हैं तो कहीं मूषक वाहन के साथ उनका मनोहारी स्वरूप दिखाई दे रहा है। मुकुट, आभूषण, वस्त्र और अलौकिक श्रृंगार से सजी प्रतिमाएं ऐसी प्रतीत होती हैं, मानो मिट्टी में स्वयं मंगलमूर्ति की छवि उतर आई हो।
लेकिन इस बार गणेश भक्तों के उत्साह के साथ महंगाई की चिंता भी साफ दिखाई दे रही है। बाजार में प्रतिमाएं देखने पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना है कि इस बार गणेश जी की मूर्तियों के दाम काफी बढ़ गए हैं। मनपसंद और सुंदर प्रतिमा खरीदने की इच्छा तो हर परिवार की है, लेकिन बढ़ी कीमतों के कारण जेब का बजट भी देखना पड़ रहा है। भक्तों के सामने एक तरफ अपने आराध्य गणपति को घर लाने की भावना है तो दूसरी तरफ महंगाई की चुनौती।
इसके बावजूद श्रद्धा में कोई कमी नहीं है। भक्तों का कहना है कि गणपति बप्पा के स्वागत में भव्यता से ज्यादा भावना महत्वपूर्ण है। प्रतिमा छोटी हो या बड़ी, यदि मन में श्रद्धा और विश्वास है तो गणपति का आशीर्वाद जरूर मिलेगा। मथुरा के मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में इन दिनों अलग ही दृश्य दिखाई दे रहा है। मिट्टी, रंग, औजार और कलाकारों की मेहनत से गणपति के विभिन्न स्वरूप आकार ले रहे हैं। प्रतिमा तैयार करने की प्रक्रिया में सबसे अधिक ध्यान भगवान गणेश के चेहरे की भाव-भंगिमा पर दिया जाता है।
आंखों की बनावट, सूंड की मुद्रा, हाथों की स्थिति, मुकुट और आभूषणों की सजावट हर चीज को बारीकी से तैयार किया जाता है। कलाकारों की कल्पना और कारीगरी के बाद मिट्टी की प्रतिमा में ऐसा आकर्षण पैदा होता है कि श्रद्धालु उसे देखते ही भक्ति भाव में डूब जाते हैं। गणेश चतुर्थी नजदीक आने के साथ मूर्तिकारों पर काम का दबाव भी बढ़ गया है। कई कलाकार देर रात तक प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं ताकि गणपति स्थापना से पहले सभी प्रतिमाएं तैयार हो सकें।
सनातन परंपरा में भगवान गणेश का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। उन्हें प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से करने की परंपरा रही है। गणेश चतुर्थी पर घरों, प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। दूर्वा, मोदक और विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं। सुबह-शाम आरती होती है और भगवान गणेश से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की जाती है।

बांग्लादेश को बुलाया भी और नहीं भी, BRICS समिट के न्योते से तारिक रहमान खफा, हुमायूं कबीर ने बताई असली वजह

अक्षत त्रिपाठी नोटिस केस में बड़ा एक्शन, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट सस्पेंड; CJI ने लगाई फटकार

BRICS Summit 2026: PM मोदी ने किया वैश्विक नेताओं का स्वागत, बोले- विश्व कल्याण पर होगी सकारात्मक बात

IMD Weather Alert: बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर का असर, ओडिशा-आंध्र समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

गुवाहाटी इंटरनेशनल मैराथन 2027: 12,000 धावकों की होगी दौड़, जानें ₹1.25 करोड़ प्राइज मनी की पूरी डिटेल