नियमों को दरकिनार कर कुछ शिक्षकों को मनचाहे विद्यालयों में तैनाती
BSA कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
CDO की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
Bribery Case BSA Office : मथुरा में बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की तैनाती और समायोजन को लेकर बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से 142 शिक्षकों की पदस्थापना और समायोजन को लेकर जारी आदेशों पर गंभीर सवाल खड़े होने के बाद मुख्य विकास अधिकारी डॉ. पूजा गुप्ता ने कड़ा रुख अपनाया है। शिकायतों और प्रथम दृष्टया सामने आई अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए CDO ने 26 सितंबर और 22 अक्टूबर को जारी पदस्थापना एवं संशोधन संबंधी सभी आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर शून्य घोषित कर दिए हैं। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है।
इस मामले में BSA कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि शिक्षकों को उनकी मनचाही जगह पर तैनाती दिलाने के नाम पर कथित तौर पर प्रति शिक्षक 4 से 5 लाख रुपये तक की अवैध वसूली की गई। शिकायत में कार्यालय के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की गई है। हालांकि, रिश्वतखोरी के इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
शिकायत में कहा गया है कि शिक्षकों की पदस्थापना और अंतर-ब्लॉक समायोजन की प्रक्रिया में शासनादेश एवं न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर कुछ शिक्षकों को मनचाहे विद्यालयों में तैनाती दी गई। इसके अलावा कार्यालयी आदेशों, अभिलेखों और संबंधित पत्रावलियों में कथित हेरफेर किए जाने की शिकायत भी सामने आई है। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए CDO मथुरा ने 26 सितंबर और 22 अक्टूबर को BSA कार्यालय से जारी पदस्थापना एवं संशोधन संबंधी सभी आदेशों को तत्काल प्रभाव से शून्य घोषित कर दिया।इसके बाद संबंधित 142 शिक्षकों को अपने मूल विद्यालयों में वापस जाकर शिक्षण कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन के इस फैसले से विभाग में हलचल मच गई है। अब यह भी जांच के दायरे में है कि किन परिस्थितियों में पदस्थापना के आदेश जारी किए गए और उनके पीछे निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं।
पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए CDO की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति को पदस्थापना और समायोजन से संबंधित आदेशों, शासनादेशों, न्यायालय के निर्देशों, विभागीय पत्रावलियों तथा शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। जांच समिति को 6 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे तक अपनी जांच आख्या सौंपने की समयसीमा निर्धारित की गई है।